भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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अलिफनामा

सुनीर सुवाजे व्यापक सब घट साईं ॥ है हजूर रहिमाना जिह नाकीजै भाई ॥१५॥ (तोय) तालिब मतलूबको पहुँचै तोफ करे दिल अन्द ॥बहुते तौफ जाय तब वायफना देव जाय पहाड़ समुन्दर ॥१६॥ (जोय) जालिम मिलै इजरयाल कबज करै जो जाना ॥ गये जुलमात कोई न बाँचे सिकंदर सुलताना ॥ १७ ॥ (ऐन) इल्म चौदाको पड़ते अमल नहीं जो लावे ॥ अमल नहीं वो इल्म ऐब है दानीश मन्द कहावै ॥ १८ ॥ (गैत) गलत ते वहि नहीं कहिये गुस्से गजबको त्यागै ॥ नाहक सुनके न्यारा रहिये कह सुनके मत भागे ॥ १९ ॥ (फे) फरमान आखिर है फानी फाजिल फहेम कहाया ॥ भिन कुल अलेहफाना कुरानो खबर कहाया ॥ २० ॥ (काफ) कलब है अरस जमीका सुनकर और नकीरा ॥ नेकी करो बदी बिसरावो कुलसे कहत कबीरा ॥२१॥ (लाम) लाहोल उसीपर जो न सुने जुगझाना ॥ साहेब से जो कोल किया था तो काहे बिसराना ॥२२॥ (मीम) मुसल्लममर्द मुसलमान कहत, सुरीद ना करना ॥ रहिये सदाईं मनसलामत जेहि विधिसे निस्तरना ॥२३॥ (नून) नोज बिलाह अलेकुम नेक सरबुनका करना ॥ नैनो अकबर हबलूल बरिद हैं हकका फरमाना ॥२४॥ (वाव) वजूवजेमे गो यमनेकी खरत सुनुफ ॥ रुयाल बदी तुस्वास दिल अन्दर सो है मर्दमुखौबफ ॥ २५ ॥ (हे) है दोनों यक सूरत दोनी ये साँई एक म्यानमें हो दो यम घर कबहु नहीं समाई ॥२६॥ (ये) येक साहब है साँचा सुनो तुम मन चित्त देको ॥ काया कबीर कहत है अन्वल आखिर येको ॥ २७ ॥

इति अलिफनामा । सप्तदशस्तरंगः