भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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शब्दावली

(१२७)

पुरुषोत्तमोयं द्विजपादवारं ॥ महारौद्र घोरं नरेशान वंशा, तोयं च बारं च वहिनीद नीशा। मदो दम दमंतं मतंगं च दीशा, मृगादी च पश्यं करीशब्दचीशा ॥ महाभयं च सुलतान सजदापि जाई, कदमखाखकेवल्य खुदेतं खोदाई। सुरशिद मिहखान साहब दिगारभ। गुनहगार बन्दो तकसीर वारम् ॥ विनय वेश सततं च कहूणा निधानं। सदा सत्य संगदि ध्येयं च ज्ञानम् ॥ रागस्थादि बन्दीछोरं नमामि, सदानन्द रूपं कवीरं भजामि ॥ इति ॥

स्तोत्र ॥

भो कवीर हरन पीर धीर बुद्धि धारणं। सत्यनाम परमधाम सर्वकरण कारणं ॥ हंसभूप परमरूप वेद विद्य छेदक। न्याय नीत अति अजीत ज्ञानवृद्ध धारणं ॥ संतरक्ष साधुपक्ष भक्तमुक्त तारणं। गुणातीत भयाभीत सर्वशिक्ष मंडनं ॥ निराधार सताधार परमपार पारणं। प्रणत पाल अतिदयाल कालजालटारणं ॥ दयासिंधु क्षिमाइंदु श्वेतबिंदु शोभितं। शब्दरूप अति अनूप अमीरूप सारणं। अकहनाम त्वं अकाममानहीन पालनं। पाप ताप दहनकृत्य तिहुँ ताप नाशनं ॥ भवातीत जोगजीत हंसरूप लक्षणं। सत्यरूप गुरुसरूप शरणागत तारणं ॥ प्रगट प्रतक्ष अक्षज्ञान रूप साक्षिनं। सत्यनाम आदिपुष्प सर्वघट भासनं ॥

सद्गुरु पदरत प्रीत अति, सारं सार विचार। सत्तनाम हंसा गहे, उतरे भौनिध पार ॥

कवीरचालीसा।

ॐ नमो आदि ब्रह्माय शब्दे सरूपं। नमोजीवजावद्व्रमय- विश्वरूपं ॥ गहु शरणप्रानी जो सुखसिंधु चहु रे। कबीर कबीर कबीर कहुरे ॥ १ ॥ का रूप करताय निरताय देखो। वा रूपविस्तार नहि आन पेशो ॥ रा रूप रमताहि सब माँहि रहुरे। कबीर