भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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शब्दावली

(२१५)

प्रिये ॥ ३२ ॥ जीवनं सर्वजीवानां भूषणं ज्ञान चक्षुषा ॥ मुक्ति दाता भक्ति दाता ज्ञान दाता नमो नमः ॥ ३३ ॥ मुक्त पदं मुक्त नामं, सर्वं वंधन मोचनम् ॥ विद्यादाता बुद्धिदाता सर्वज्ञाय नमो नमः ॥ ३४ ॥ परीक्षा प्रेरकन्नाम, समाधाय प्रदानकम् ॥ प्राप्ति कर्ता प्राप्ति रूपं, भक्ति नाथ नमो नमः ॥ ३५ ॥ सगुणं सगुणश्चैव, प्रसन्नं करुणाकरम् ॥ विचारं च प्रमोदारं, सर्वोत्कृष्ट नमो नमः ॥ ३६ ॥ भ्रमसंहारनन्नाम काम संहारनं मसि ॥ क्रोध दमनमक्रोधं, मोह निर्मोह नाशकम् ॥ ३७ ॥ निलौभं सर्वजीताय अजीताय जितेन्द्रियः ॥ सर्वं वस्य अवस्यं च सर्वमान्य अमान्ययोः ॥ ३८ ॥ सर्वं पूज्यं मंत्र मूलं, ध्यान मूलं स्वरूपकम् ॥ ज्ञान विज्ञान मूलाय, हंस मूलं हंसं प्रिये ॥ ३९ ॥ अयोनि संभवकृपा कटाक्षं, अवीर्ये अरेत अकाम रूपम् ॥ अपाप अतात अजा अतीत, अविगत्य रूपं अहं नमामि ॥ ४० ॥ अखिलादिखिलं ज्ञाता, अखिलानंदती- तयोः ॥ सन्त सन्तप्रियो नामं परं स्नेही परावृत्तिः ॥ ४१ ॥ उद्धारं भौहारकं च, निरंजनातीतप्रभु ॥ कर्ममोचनं नामाये निर्भरः शीतलाश्रयः ॥ ४२ ॥ भुंगीनाम अभैनामं, शीलनाम सुखाण्वम् ॥ परमनामाय सुतिंश्च, विजपाय जपातियो ॥ ४३ ॥ अमलत्रिमलश्चैव; हंसज्ञ हंस नायकम् ॥ भक्त सहाय कर्ता च सुखदाता सुखः प्रभु ॥ ४४ ॥ सत्यवक्ता प्रकाशं च, परमं पारखलीलया । अमोल मंगलन्नाम अविचलं, गुरुवे नमः ॥ ४५ ॥ संतोष शक्त बीरं च, साधू कबीर नामयम् । हंस कबीर नामाय, गुरु कबीर नमो नमः ॥ ४६ ॥ परमं गुरु परमं वैद्यं, परमलक्ष पदानये ॥ सिद्ध कबीर नामाय, निरालम्ब कल्पनुमः ॥ ४७ ॥ निर्विघ्न करुणा रूपं, दिव्यनाम अनामयम् ॥ छायातीतं, मायातीतं कायातीतं नमोनमः ॥ ४८ ॥ कालमर्दन कीर्तिं वर्द्धनं, वृक्ष रक्षकं ज्ञान अक्षकम् । सुखः सागरं