कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
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अनुक्रमणिका ।
(१९)
| नंबर | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|
| ५४ | स्तोत्र फुटकर उर्दू हिन्दी- | |
| गजल शेर कवित्त साखी | ||
| आदि कवीश्वरोंके वचन ... | २२९ | |
| ५५ | सद्गुरुको महिमा साखियाँ २५९ से २७६ | |
| ५६ | गजल कम्वाली प्रार्थना ... | २७६ |
| ५७ | गुरु स्तुति संस्कृत ... | २७७ |
| ५८ | दूसरे खण्ड की समाप्ति ... | २७७ |
| तीसरा खण्ड । | ||
| ८ | अध्यात्म साधन (चौका | |
| विधान) ... | ||
| गुरु पूजा प्रकरण (संगला- | ||
| चरण) 1: ... | २७८ | |
| २ | उछाह मंगल (पधरावनीके | |
| शब्द) ... | २७८ | |
| १ | छत्तीसगढ़ी चौका विधानके | |
| पद X ... | २८१ | |
| २ | व्यंजनभोगका शब्द ... | २८१ |
| ३ | शब्द ध्वन ... | २८२ |
| ४ | ,, गारी ... | २८२ |
| ५ | ,, अचवन ... | २८३ |
| ६ | ,, विजना ... | २८३ |
| ७ | ,, भोगकी आरती ... | २८४ |
| ८ | चौकाकी रमैनी ... | २८४ |
| ९ | चौकाके पद ... | २८६ |
| १० | पद डोरी ... | २८९ |
| ११ | चौपड ... | २९१ |
| १२ | चौकाकी आरती और मंगल | |
| बन जा दिन ... | २९२ | |
| १३ | नारियलका शब्द (मोरहु | |
| नरियर मोरहु हो) ... | २९३ | |
| १४ | भोगका शब्द (सत पुरुषको | |
| भोग लागे) ... | २९३ | |
| १५ | तिनका का शब्द (जमुनियाको | |
| डार) ... | २९४ |
| नंबर | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|
| १६ | शब्द कंठीका (पाया निज- | |
| नाथ गलेको हुरबा) ... | २९४ | |
| १७ | शब्द नामका (गुरु पंड्या | |
| लागो नाथ लखावदीजे | ||
| हो) ... | २९४ | |
| १८ | शब्द दोहल प्रारम्भ, | |
| दोहल ... | २९५ | |
| १९ | आरती दर्शन जिसमें २५ | |
| आरती हैं ... | ३०७ | |
| आवश्यक कितापि (चौका विधानके | ||
| दूसरे भागके विषयमें इसमें | ||
| रोसडा स्थानका संक्षिप्त | ||
| वर्णन है 1) ... | ३१५ | |
| अध्यात्म साधन गुरु पूजा प्रकरण | ||
| दूसरा भाग “आनंदी चौका” | ३२१ | |
| ९ | पूर्व बिहारादि प्रदेशोंमें प्रच- | |
| लित चौकाविधान प्रारम्भ X ... | ३२१ | |
| १ | रमैनी ८ ... | ३२१ |
| २ | शब्द नारियर (वनजारिन) ... | ३२४ |
| ३ | आरती चौकाकी ... | ३२५ |
| ४ | शब्द भोग (सतपुरुष भोग | |
| लागे) ... | ३२६ | |
| ५ | शब्द तिनका ... | ३२७ |
| ६ | शब्द नाम लखावन ... | ३२७ |
| ७ | शब्द कंठी ... | ३२८ |
| ८ | शब्द उपदेश (घन सतगुरु जिन | |
| दियो उपदेश) ... | ३२८ | |
| ९ | शब्द अजी (समुन्नति गहो मोरि | |
| वाहीं) ... | ३२९ | |
| १० | पान परवानाका शब्द ... | ३३० |
X इस हेंडिगमें पृष्ठ २८१ पर “चौका विधान के पद” के बदले “चौकी विधानकी पद” छप गया है सो पाठक सुधार लेंगे ।