भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

Devanagarihipublished968 पृष्ठ

पृष्ठ 335, कुल 968 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 335

सत्यनाम ।

अथ अध्यात्म साधन गुरु पूजा प्रकरण ।

दूसरा भाग ॥

पूर्व विहार विरोधकर दोसखा कबीरमन्दिरमें प्रचलित चौका विधान ग्रन्थः ।

खनो ॥ १ ॥

साखी-चौका चन्दन कीजिये, मलयगिरिके नाम ।

चारो कमल सुधारिये, मध्य ताहिको धाम ॥ १ ॥

प्रथमहि मन्दिर चौका पुराये । उत्तम आसन भेत विछाये ॥ हंसा पगु आसनपर दीन्हा । सत्य कबीर कही कहि लीन्हा ॥ नाम प्रताप हंसपर छाजे । हंसहि भार रती नहि लाजे ॥ भार उतारि आप शिर लीन्हा । हंस छोड़ाय कालसे दीन्हा ॥ साधु सन्त मिलि बैठे आयी । बहु बिधि भक्ति करें चितलायी ॥ पान सुपारी नारियर भेवा । लवंग इलायची किसमिस मेवा ॥ सवा सेर आनो मिष्ठाना । और सवा सौ उत्तम पाना ॥ सात हाथ बसतर परमाना । सो सतगुरुके आगे आना ॥ इतना होय और नहि भाई । जासे काल दगा मिटि जाई ॥ धन्य सन्त जिन आरति साजा । दुःख दरिद्र वा घरसे भाजा ॥ कहहिं कबीर सुनो धर्मदासा । सोहम् ओहम् शब्द परकासा ❁ ॥ २ ॥

खनो ॥ २ ॥

साखी-चौका चार सुधारहू, चार कमल असथान ।

चारो पवन उरेहिके, देखो तत्व अमान ॥ ३ ॥

  • पुरानी प्रतियोंमें यह पद यों है—कहे कबीर सुनो भाई साधो । सोहँ सोहँ शब्द अराधो ॥

कबीरपंथी शब्दावली ११