कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
Devanagarihipublished968 पृष्ठ
पृष्ठ 958, कुल 968 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 958
अथ गृढार्थं चिंतामणि कोष
कवीराश्रमाचार्यं परमार्थो वैद्य
भारत पथिक स्वामी
श्रीयुगलानन्दविहारी विरचित ॥
द्विविध शब्द ।
| गुरु | शिष्य | ब्रह्म | माया | ईश्वर | जगत् |
|---|---|---|---|---|---|
| चैतन | जड | सुख | दुःख | पुण्य | पाप |
| स्वर्ग | नरक | गुण | दोष | देवता | राक्षस |
| दयाल | काल | कारण | कार्यं | निमित्त | उपादान |
| रक्षक | भक्षक | दक्षिण | वाम | शुद्ध | मलिन |
| मुख्य | गौण | विशेष | सामान्य | समष्टि | व्यष्टि |
| विशेष | आवरण | स्थिर | चञ्चल | निराकार | साकार |
| सुगन्ध | दुर्गन्ध | अपरा | परा | वक्ता | श्रोता |
| दैवी | आसुरी | आधि | व्याधि | निर्गुण | सगुण |
| जीव | जीव | स्वामी | सेवक | पिता | पुत्र |
| पुरुष | स्त्री | नर | नारी | पुरुष | प्रकृति |
| जन्म | मरण | दिन | रात्रि | प्रकाश | अन्धकार |
| एक | अनन्त | चतुर | मूर्ख | राग | द्वेष |
| स्तुति | निन्दा | जीव | शिव | काम | क्रोध |
परस्पर विरुद्ध तथा भय संयुक्त द्विविध पदार्थ ॥
| विद्या | वाद | तप | क्षय | द्व्य | राजा, चोर |
|---|---|---|---|---|---|
| भोग | रोग | काया | काल | साधन | इन्द्री |
| योग | विषय | स्वर्गवासी | अवधि | मंत्र | यन्त्र |
| यन्त्र | तंत्र | तंत्र | सिद्ध | सिद्ध | माया |
| माया | ज्ञान | सज्जन | दुर्जन | मित्र | शत्रु |
| मिलना | विछुरना | आना | जाना | पंडित स्तुति | निन्दा |
| मूर्ख | मार | गृद्ध | समाधान | कुल | अति नारि |
| कर्म | अकर्म | उपासना | विशेष | ज्ञान | अज्ञान |