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भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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अथ गृढार्थं चिंतामणि कोष

कवीराश्रमाचार्यं परमार्थो वैद्य

भारत पथिक स्वामी

श्रीयुगलानन्दविहारी विरचित ॥

द्विविध शब्द ।

गुरुशिष्यब्रह्ममायाईश्वरजगत्
चैतनजडसुखदुःखपुण्यपाप
स्वर्गनरकगुणदोषदेवताराक्षस
दयालकालकारणकार्यंनिमित्तउपादान
रक्षकभक्षकदक्षिणवामशुद्धमलिन
मुख्यगौणविशेषसामान्यसमष्टिव्यष्टि
विशेषआवरणस्थिरचञ्चलनिराकारसाकार
सुगन्धदुर्गन्धअपरापरावक्ताश्रोता
दैवीआसुरीआधिव्याधिनिर्गुणसगुण
जीवजीवस्वामीसेवकपितापुत्र
पुरुषस्त्रीनरनारीपुरुषप्रकृति
जन्ममरणदिनरात्रिप्रकाशअन्धकार
एकअनन्तचतुरमूर्खरागद्वेष
स्तुतिनिन्दाजीवशिवकामक्रोध

परस्पर विरुद्ध तथा भय संयुक्त द्विविध पदार्थ ॥

विद्यावादतपक्षयद्व्यराजा, चोर
भोगरोगकायाकालसाधनइन्द्री
योगविषयस्वर्गवासीअवधिमंत्रयन्त्र
यन्त्रतंत्रतंत्रसिद्धसिद्धमाया
मायाज्ञानसज्जनदुर्जनमित्रशत्रु
मिलनाविछुरनाआनाजानापंडित स्तुतिनिन्दा
मूर्खमारगृद्धसमाधानकुलअति नारि
कर्मअकर्मउपासनाविशेषज्ञानअज्ञान