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कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

Devanagarihipublished968 पृष्ठ

मूढार्चिचितामणिकोष ।

(१५१)

॥ सप्त विधि ॥

ऋषी— वशिष्ठ अत्रि, कश्यप, विश्वामित्र, भरद्वाज, जमदग्नि, गौतम आवरण— जल, पवन, अग्नि आकाश अहंकार, महत्त्व प्रकृति ज्ञानभूमिका-शुभइच्छा, सुविचारण तनुमानसा, सर्वपापति, असंशक्ति, पदार्थाभावनी, तुर्वा अज्ञानभू०—अशुचि जाग्रत, महाजाग्रत, जाग्रत स्वप्न, स्वप्न जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति, बीज— ओं, श्रीं, रं, सौं, रौं, ह्रीं, क्लीं, ॥

अ, इ, उ, ए, व, म, ह,

कर्मादि ६—कर्म,उपासना,योगज्ञानउत्पत्तिनाश
कर्म—यजन, याजन,अध्यायनअध्यापन,दान,प्रतिग्रह,मैथुन
उपास्य—शिव,विष्णुगणपतिसूर्यशक्तिराम, कृष्ण ॥
योगप्रकार ॥ हठ,कुंडली,लाम्बका,तारकलय,असनस्क, सांख्य ॥
उत्पत्ति—शब्द,स्पर्श,रूप,रस,गंध,इच्छा, वासना ॥
स्थिति—अन्नपानी,घास,मिट्टी,पत्ती,फूल, फल ॥
लय (नाश)—पृथ्वी,वायु,जल,अग्नि,हाथ,पग, दांत ॥
दिनसात—शनिवार,रविवार,चंद्रवार,भंगलवार,बुधवार,गुरुवार, शुक्रवार, ॥
ऊपरके लोक—भूर,भुवर,स्वर,महर,जन,तप,
नीचेके अतल,वितल,सुतल,तलातल,रसातल,महातल,
धातु—रस,रुधिर,मांस,मेद,मज्जा,अस्थि,
रूपरंग—शुक्ल,कृष्ण,पीत,रक्त,हरित,कपिल,
चित्र ॥

॥ अष्ट विधि ॥

योगके अंग—यम,नियम,आसन,प्राणायाम,प्रत्याहार,धारणा,ध्यान,समाधि ।
सिद्धि—अणिमा,महिमा,लधिमा,गिरिमा,प्राप्ति,प्राकाम्य,ईशित्व,वशित्व ॥
पाश—दया,शंकाभय,लज्जा,निंदा,कुल,शील,धन, ॥
प्रकृति—पृथ्वी,जल,अग्नि,वायु,आकाश,मन,बुद्धि, ॥
मैथुन—श्रवण, स्मरण,कीर्तन,चिंतन,एकांतवातसंकल्प दृढ,प्रयत्न,तन,प्राप्ति, ॥
करना,
मद—कुल,धन,रूप,प्यौवन,विद्या,तप,राज्य ॥

॥ नव विधि ॥

लिङ्ग शरीरके तत्त्व—श्रोत्र, त्वचा, चक्षु, जिह्वा, घ्राण, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार ॥ ग्रह—सूर्य, चंद्र, बुध, अंगारक इत्यादि ॥ भक्ति—श्रवण, कीर्तन, स्मरण, चरणसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य, आत्मनिवेदन ॥ नवगुण ब्राह्मणके—धृति, क्षमा दम, अस्तेय, शौच, इन्द्रियनिग्रह, ज्ञान, विद्या, सत्य ॥

॥ वराविधि ॥

औतार मुख—१ १ मत्स्य, ३ कूर्म, ३ वराह, ४ नरसिंह, ५ वामन, ६ परशुराम, ७ राम, ८ कृष्ण, ९ बौद्ध, १० कर्लकी ।

(९५२)

गूढार्थचिन्तामणिकोष ।

नाडिका और देवता-महाविद्यादश- १ काली, २ दुर्गा, ३ भुवना, ४ बगला, ५ मातंगी, ६ धूमा, ७ तारा ८ छिम्स्ता, ९ त्रिपुरा, १० कमला, १ इडा (चंद्र) देवता हरि । २ पिंगला (सूर्य), देवता ब्रह्मा ॥ ३ सुमुमन मध्यमा, रुद्र, ॥ ४ गांधारी, दक्षिण नेत्र, इन्द्र ॥ ५ हस्त जिह्वा वाम नेत्र-वरुण ॥ ६ पुष्प दक्षिण कर्ण ईश्वर ॥ ७ यशस्विनी वामकर्ण-ब्रह्मा ॥ ८ कुंडं गुदा-पृथ्वी ९ अलम्बुषा मेढ्र सूर्य १० शंखिनी नाभी-चंद्र ॥

रस (कवितাকে) शृंगार, वीर, करुण, अद्भुत, हास्य, भयानक, बीभत्स, रौद्र शांति प्रेमभक्ती वा ज्ञान ।

॥ एकादश विधि ॥

रुद्र—१० प्राण ग्यारहवां मन ॥

ज्ञान साधन—विवेक, वैराग्य, षट्सम्पत्ति मुमुक्षता, गुरुसंपत्ति, श्रवण, तत्त्वज्ञानाभ्यास मनन, निदि- ध्यासन, मनोनाश, वासना क्षय ॥

॥ द्वादशविधि ॥

मास—चैत्र, वैशाखसे फालगुन तक ॥

आभारण ॥ नुपूर, चूड़ी, हार, कंकण, अंगूठी, बाजूबंद बेसर बिरिया, टीका, शिशफूल, तागडी, (करधनी) कण्ठधी ॥

द्वादश महावाक्य—तत् त्वम, आदि ॥

तिलक १२ ।

ऊर्ध्वं पुण्ड्र मस्तक, प्रथम, ब्रह्म रंध्र पुनि जोय ।

त्रितिय नेत्र दोउ कण्ठपुनि, उरनाभी फिर होय ॥ १५ ॥

उर दोहु बिशि भुज दोऊ पुनि, तथा पृष्ठ प्रबाण ।

बरन वैष्णवके यही, द्वादश तिलक बखान ॥ १६ ॥

इजोल—बारह ॥

॥ चतुर्दशविधि ॥

विद्या— १ ब्रह्मज्ञान, २ रसायन, ३ श्रुति, कथा, ४ वैश्वक, ५ ज्योतिष, ६ व्याकरण, ७ धनुर्विद्या, ८ जलतरना, ९ संगीत, १० नाटक, ११ अश्वारोहण, १२ कोकशास्त्र, १३ चोरी, १४ चतुरता ॥

॥ चौदह मासूम मुसलमानी धर्म के ॥

इति संक्षेप गूढार्थ चिन्तामणी कोष कवीराश्रमाचार्य्य स्वामी श्रीयुगलानन्द विहारी विरचित

॥ समाप्त शुभम् ॥

This image shows a blank, aged, cream-colored page, likely an endpaper or flyleaf from an old book. The paper has a slightly textured appearance with some minor creases and discoloration, particularly along the left edge and bottom. There is no text or other markings on the page.

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खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई