कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
(९५२)
गूढार्थचिन्तामणिकोष ।
नाडिका और देवता-महाविद्यादश- १ काली, २ दुर्गा, ३ भुवना, ४ बगला, ५ मातंगी, ६ धूमा, ७ तारा ८ छिम्स्ता, ९ त्रिपुरा, १० कमला, १ इडा (चंद्र) देवता हरि । २ पिंगला (सूर्य), देवता ब्रह्मा ॥ ३ सुमुमन मध्यमा, रुद्र, ॥ ४ गांधारी, दक्षिण नेत्र, इन्द्र ॥ ५ हस्त जिह्वा वाम नेत्र-वरुण ॥ ६ पुष्प दक्षिण कर्ण ईश्वर ॥ ७ यशस्विनी वामकर्ण-ब्रह्मा ॥ ८ कुंडं गुदा-पृथ्वी ९ अलम्बुषा मेढ्र सूर्य १० शंखिनी नाभी-चंद्र ॥
रस (कवितাকে) शृंगार, वीर, करुण, अद्भुत, हास्य, भयानक, बीभत्स, रौद्र शांति प्रेमभक्ती वा ज्ञान ।
॥ एकादश विधि ॥
रुद्र—१० प्राण ग्यारहवां मन ॥
ज्ञान साधन—विवेक, वैराग्य, षट्सम्पत्ति मुमुक्षता, गुरुसंपत्ति, श्रवण, तत्त्वज्ञानाभ्यास मनन, निदि- ध्यासन, मनोनाश, वासना क्षय ॥
॥ द्वादशविधि ॥
मास—चैत्र, वैशाखसे फालगुन तक ॥
आभारण ॥ नुपूर, चूड़ी, हार, कंकण, अंगूठी, बाजूबंद बेसर बिरिया, टीका, शिशफूल, तागडी, (करधनी) कण्ठधी ॥
द्वादश महावाक्य—तत् त्वम, आदि ॥
तिलक १२ ।
ऊर्ध्वं पुण्ड्र मस्तक, प्रथम, ब्रह्म रंध्र पुनि जोय ।
त्रितिय नेत्र दोउ कण्ठपुनि, उरनाभी फिर होय ॥ १५ ॥
उर दोहु बिशि भुज दोऊ पुनि, तथा पृष्ठ प्रबाण ।
बरन वैष्णवके यही, द्वादश तिलक बखान ॥ १६ ॥
इजोल—बारह ॥
॥ चतुर्दशविधि ॥
विद्या— १ ब्रह्मज्ञान, २ रसायन, ३ श्रुति, कथा, ४ वैश्वक, ५ ज्योतिष, ६ व्याकरण, ७ धनुर्विद्या, ८ जलतरना, ९ संगीत, १० नाटक, ११ अश्वारोहण, १२ कोकशास्त्र, १३ चोरी, १४ चतुरता ॥
॥ चौदह मासूम मुसलमानी धर्म के ॥
इति संक्षेप गूढार्थ चिन्तामणी कोष कवीराश्रमाचार्य्य स्वामी श्रीयुगलानन्द विहारी विरचित
॥ समाप्त शुभम् ॥
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खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई