कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
पृष्ठ 123, कुल 442 में से
संदर्भ में पढ़ें१२४ श्रीकालिका पुराण औषधियाँ भी क्षय को प्राप्त हो गयी थीं । औषधियों के अभाव से ही इस लोक में यज्ञों की सम्प्रवृत्ति नहीं हुआ करती है । यज्ञों के न होने ही से वृष्टि का अभाव हो रहा है और समस्त प्रजाओं का क्षय हो रहा है । यज्ञ के भागों के उपयोग से हीन आप लोगों की दुर्बलता समुत्पन्न हो गई और स्वगोचर से विकार को गया है । यही सम्पूर्ण हमने आपको बतला दिया है जिस रीति से लोकों में विप्लव हो रहा है । हे सुरोत्तमों! अब यह भी आप लोग श्रवण कर लीजिए कि जिस उपाय से इस विप्लव की शान्ति होगी । ब्रह्माजी ने कहा-हे सुरगणों! अब आप सब लोग दक्ष प्रजापति के गृह को चले जाइए और उनको प्रसन्न करिए कि चन्द्रदेव का अर्थात उनके क्षीण होने का महारोग दूर हो जावे । चन्द्रदेव के परिपूर्ण हो जाने पर सम्पूर्ण जगत् प्रकृति में स्थित हो जायेगा और आपको भी शान्ति की प्राप्ति हो जायेगी तथा समस्त औषधियों की समुत्पत्ति भी हो जायेगी । मार्कण्डेय महर्षि ने कहा-ब्रह्माजी के इस वचनामृत का श्रवण करके समस्त देवगण जिनमें इन्द्रदेव सबके आगे चलने वाले नायक से परम प्रसन्न मन वाले होते हुए उस समय में दक्ष प्रजापति के सदन अर्थात निवास स्थान पर गए थे । वहाँ पर सब सुरगणों ने नीति के अनुसार उपस्थान करके मुनिवर प्रजापति दक्ष को प्रणाम करके बहुत ही विनम्रता संयुत मधुर वाणी से उन्होंने कहा । देवों ने कहा-हे ब्राह्मण! अत्यन्त दुःखित हमारे ऊपर प्रसन्न होइये, हे महाबुद्धे ! हमारी इस शोक के सागर से रक्षा कीजिए और उद्धार करिए । सृष्टि की रचना करने वाले परमात्मा का ब्रह्मा संज्ञा वाला जो रूप है उन्हीं के अंश समस्त जगतों के आप परम ज्योति हैं । हे विप्ररूप! आपके लिए हमारा नमस्कार है । प्रजा की रक्षा करने से और प्रजा के पालन करने के कारण से दक्ष और प्रजापति आप योगेश हैं, आपको हम प्रणाम करते हैं । समस्त जगतों की रक्षा के लिए और कुशल आत्मा वालों के लिए तथा आत्मा के हित के लिए, दक्ष के लिए, महात्मा के लिए शीघ्र