कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
पृष्ठ 167, कुल 442 में से
संदर्भ में पढ़ें൘ श्रीकालिका पुराण ൘ १६९ है वैसे ही आप अंपने आपको विभक्त करिए। आप भी बहुत सृष्टि के ही लिए हैं और आप भी प्रजापति हैं। इसके अनन्तर ब्रह्माजी दो भागों में विभक्त हो गये थे। वे अपने आधे भाग में पुरुष हुए थे और आधे भाग में नारी हो गए थे और उसमें प्रभु ने विराट का सृजन किया था। उसको भगवान ब्रह्माजी ने कहा था-हे प्रजापते! सृष्टि की रचना करो। उस विराट् ने भी तपश्चर्या का तपन करके उसने स्वायम्भुव मनु का सृजन किया था। उस स्वायम्भु मनु ने भी तप करके ब्रह्माजी को परितुष्ट कर दिया था। उसके द्वारा तुष्ट हुए ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना करने के लिए अपने मन से दक्ष का सृजन किया था अर्थात् दक्ष को मन से ही उत्पन्न कर दिया था। दक्ष के सृष्ट हो जाने पर मनु के द्वारा दशावतार ब्रह्मा प्रणत हुए थे और फिर भी और मानस पुत्रों की सृष्टि की थी। उन पुत्रों के नाम ये हैं-मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, प्रचेता, वशिष्ठ, भृगु और नारद। इन सबका उत्पादन करके जो कि मन के ही द्वारा हुआ था फिर स्वायम्भू मनु से उन्होंने कहा था कि आप सृजन करो, यही कहकर लोकों के ईश ब्रह्माजी अन्तर्धान हो गये थे। वाराह भगवान ने इसके अनन्तर पौत्र से द्वारा सात सागरों को खोदकर परमेश्वर ने पृथिवी को उनको वलय के आधार वाले बनाकर सृजन किया था। इसके उपरान्त इन्होंने सात बार भ्रमण करने के द्वारा सात सागरों की रचना करके सात द्वीपों को अवच्छिन्न करके वे फिर पृथ्वी के अन्दर चले गये थे। लोकालोक पर्वत को इस पृथ्वी का वेष्टना बना करके स्थित कर दिया था। उसको सुदृढ़ रूप से भित्ति प्रान्त में गृह की ही भाँति स्थापित कर दिया था। हे विप्रगणो! मैंने आप लोगों के समक्ष में यह आदि सृष्टि का वर्णन कर दिया है। हे महर्षियों! प्रतिसर्ग में मैं इसको बतलाऊँगा उसे आप श्रवण करिए। मार्कण्डेय महर्षि ने कहा-यह आप लोगों ने वाराह सर्ग का श्रवण कर लिया है क्योंकि यह वाराह से ही अधिष्ठित है। आप सबने प्रतिसर्ग का भी श्रवण किया है जो दक्ष आदि के द्वारा पृथक किया