कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंइसके अनन्तर तीन पुत्रों के द्वारा वे उनका जगतों के हित के लिए निबंध करें। इस जगत से परिपूर्ण को सुवृत्त, घोर और कनक से रक्षा करो। यज्ञ से देव और प्रजा, यज्ञ से अन्य नियोगी यह सभी कुछ यज्ञ से ही सदा होने वाला है। यह सब जगत यज्ञों से परिपूर्ण है। मालिनी पृथ्व्वी पुनः जिससे इस गर्भ को धारण किया था वह देवी स्वयं उस समुत्पन्न पुत्र का भली-भाँति रक्षण करेगी। जिस समय में काल प्राप्त होता है उसी समय में देवी आयुष्मान बोलती है। उसके वध के विषय में जब काम से अत्यन्त आर्त्त होती है तभी इसका वध करेगी। जिस समय में भग्न हुई भारती पृथ्व्वी को नीचे की ओर होगी तभी भृंगी वाराह के रूप से उसी समय मैं उसका उद्धार करूँगा। तब आपका पुत्र अपने शरीर को कृतकृत्य अर्थात् सफल समझकर उसका त्याग कर देगा। इस प्रकार से यज्ञ वाराह के कहे जाने पर जो कि बलवान थे एक महान तेज जो ज्वालाओं की महामालाओं से दीप्त था, महाकाल था वह तेज करोड़ों सूर्यों के समान देदीप्यमान था और महान अद्भुत था। वह उस समय में वाराह के शरीर से निकलकर भगवान हरि के शरीर में प्रवेश कर गया था। हे द्विजो! उन भगवान विष्णु में वाराह के तेज से प्रविष्ट होने पर फिर भगवान हरि ने सुवृत्त, कनक और घोर से तेज से प्रविष्ट होने पर फिर भगवान हरि ने सुवृत्त, कनक और घोर से तेज को स्वयं ही आदान कर लिया था। उनके शरीर में भी तेज का भाग अलग-अलग निकलकर ज्वालाओं की माला से अत्यधिक दीप्त हो गया। वह भगवान हरि के शरीर में प्रवेश कर गया था जैसे उनका पिता को ठीक वैसे ही प्रविष्ट हो गया था। इसके अनन्तर भगवान हरि, ब्रह्मा और महादेव वराह के उस वचन की प्रतिज्ञा करके और बार-बार 'ओम' यह कहा था। 'ओम्' यह स्वीकृति के लिए प्रयुक्त होता है। उनके शरीर के परित्याग करने में उत्तम यत्न किया था। उसके उपरान्त शरभ के तुण्ड के प्रहारों से कुछ के मध्य में वाराह से शरीर का भेदन करके उसे जल में गिरा दिया था। उसका प्रथम पतन करके उसी भाँति सुवृत्त, कनक और घोर को कण्ठ भाग में भेदन कर-करके हनन कर दिया था।