भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 198, कुल 442 में से

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पृष्ठ 198

२०० ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ पुण्य का करने वाला है। जिस जनपद में ये तीनों वह्नियों का हवन किया जाता है उस जनपद में नित्य ही चतुर्वर्ग विद्यमान रहा करता है। चारों वर्ग धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष होते हैं। हे द्विज श्रेष्ठो! जो मुझसे आपने पूछा है वह मैंने सब ही आपको बतला दिया है। जिस प्रकार से यज्ञ वाराह का देह यज्ञत्व को प्राप्त हुआ था और जिस तरह से उनके पुत्रों के देह से वह्नियां हुई थी। मार्कण्डेय महर्षि ने कहा-जिस कारण से भगवान ने आकालित यह प्रलय किया था हे महाभागो! उस वाराह लोक संक्षय का आप श्रवण कीजिए। अथवा जिस तरह से भगवान शार्ङ्गधारी ने मत्स्य के स्वरूप के द्वारा वेदों का त्राण अर्थात् रक्षा की वह मैं सब पापों के विनाश करने वाला आख्यान आप लोगों को बतलाऊँगा। कपिल अवतार आख्यान प्राचीन समय में ईश्वर भगवान विष्णु महामुनि सिद्ध कपिल हुए थे जो स्वयं साक्षात् हर थे और सिद्धों के उत्तम मुनि हुए थे। इस प्रकार से सिद्ध का ध्यान करते हुए यह सम्पूर्ण जगत् स्वतः ही समुत्पन्न हुआ था क्योंकि यह भगवान हरि के शरीर से समुद्गत हुआ था इसी कारण से वह कपिल कहे गये हैं। वह एक बार स्वायम्भुव मनु के अन्तर में होकर मुनि श्रेष्ठ से यह वाक्य कहा था। कपिल देव ने कहा-हे स्वायम्भुव! आप तो मुनियों में बहुत ही अधिक श्रेष्ठ हैं। हे महापते! आप तो ब्रह्मा के ही रूप से समन्वित हैं इस समय में आप प्रार्थना करने वाले मेरे ही अभीष्ट को मुझे प्रदान करिए। यह सम्पूर्ण जगत आपका ही है और आपके द्वारा ही परिपालित है। आपने ही इस सम्पूर्ण जगत् की रचना की है और आप ही इन जगतों के स्वामी हैं। स्वर्ग में, पृथ्वी में और पाताल में, देव, मनुष्य और जन्तुओं में आप ही स्वामी हैं, वरदान देने वाले हैं। रक्षा करने वाले हैं और आप ही एक सनातन हैं अर्थात सर्वदा से चले आने वाले हैं। आप ही धाता, विधाता हैं और आप ही सब ईश्वरों के ईश्वर हैं आप में ही सब कुछ प्रतिष्ठित