भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 207, कुल 442 में से

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पृष्ठ 207

ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ २०९ समय में मुझको जान लेंगे अर्थात् आपको मेरा ज्ञान प्राप्त हो जायेगा। हे मनुदेव ! जब तक यह जल का प्लवन रहे तभी तक जो भी कुछ आपको करना चाहिए वह अब आप परम सावधान होकर श्रवण कीजिए जो कि परम पथ्य अर्थात् हितकर है वहीं मैं कह रहा हूँ। सब यज्ञ सम्बन्धी कोष्ठों के समूह के द्वारा एक नौका निर्माण कराइये। उस नौका को मैं ऐसी परम बना दूँगा जिससे कि जलों से वह भिदी हुई न होवे। नौका ऐसी होनी चाहिए कि वह दश योजनों के विस्तार से युक्त होवे और तीस योजन पर्यन्त आयत अर्थात् चौड़ी होवे, जो सम्पूर्ण बीजों के अर्थात् बीज के स्वरूप में रहने वालों के धारण करने वाली हो और तीनों भुवनों के वर्धन करने वाली होवे। समस्त यज्ञों से सम्बन्ध रखने वाले वृक्षों के तन्तुओं से निर्मित की जावे। जो नौ योजन तक दीर्घ होने तथा व्यास त्रय तक विस्तृत होवे अर्थात् तीन व्योमों के विस्तार से युक्त होवे। हे मनुदेव! आप शीघ्र ही वृहती वरीरिका बटी करिए जो जगत की धात्री जगत की माया, लोकों की माता और जगतों से परिपूर्ण वह उस रज्जु (रस्सी) को सुदृढ़ कर देंगी जो किसी प्रकार से भी त्रुटित न होवे। इस वर्तमान जल के प्लवन होने के समय उस नौका में सब बीजों को अर्थात् बीज स्वरूपों को रखकर तथा समस्त वेदों को और सात ऋषियों को बिठाकर आप भी उसमें निष्णण हो जाइए। हे मनुदेव! आप दक्ष के साथ मिलाकर मेरा स्मरण करेंगे उसी समय में स्मरण किया हुआ मैं आपके समीप में आ जाऊँगा। मैं श्यामल शृंग से समन्वित होऊँगा। उसी समय में आपको मेरा ज्ञान प्राप्त हो जायेगा। जिस समय पर्यन्त यह तीनों भुवन हत, प्रहत, विध्वंस रहेंगे तभी तक मैं अपने पृष्ठ भाग के द्वारा उस नौका के वहन करने वाला रहूँगा। इसमें लेशमात्र भी संशय का अवसर नहीं है। मेरे शृंग के जल में प्लवित हो जाने पर उस नौका को उस समय में आप वरीरिका से दृढ़ता के साथ सन्धन करेंगे। मेरे शृंग में नौका के निबद्ध हो जाने पर देवों के परिमाण से एक सहस्र वर्षों तक जल का शोषण