कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें६०८२ श्रीकालिका पुराण ६०८२ २३
में यह भी सर्वदा चारुहास वाली हो जाया करेगी। जिस प्रकार लक्ष्मी साथ गमन करने वाली होती है और मेघों के साथ विद्युत रहा करती है उसी भाँति मेरी प्रजाध्यक्ष सहायिनी होगी। मार्कण्डेय मुनि ने कहा-कामदेव ने इस रीति से यह कहकर रति देवी को बहुत ही उत्सुकता के सहित होकर ग्रहण किया था जिस प्रकार से सागर से समुत्थित उत्तमा लक्ष्मी को भगवान् हृषीकेश ने ग्रहण कर लिया था। भिन्न पीतप्रभा वाला कामदेव उस रति के साथ शोभित हुआ था जिस प्रकार से सन्ध्या के समय में मनोहर सौदामिनी के साथ मेघ की शोभा हुआ करती है। इस रीति से बहुत ही अधिक मोद से युक्त रति के पति कामदेव ने उस रति को अपने हृदय में विद्या को योगदर्शी के ही समान परिग्रहण किया था। रति ने भी परम श्रेष्ठ पति को प्राप्त करके परमाधिक सन्तोष को प्राप्त किया था अर्थात् अत्यन्त सन्तुष्ट हो गई थी। जैसे कमल से समुत्पन्ना पूर्ण चन्द्र के समान मुख वाली लक्ष्मी भगवान् हरि को प्राप्त करके सन्तुष्ट हो गयी थी। बसन्त आगमन वर्णन महर्षि मार्कण्डेय ने कहा-तभी से लेकर ब्रह्माजी भी समय-समय में ही परिपीडित होकर चिन्तन किया करते थे कि भगवान् शम्भु ने मेरी केवल कान्ता के प्रति अभिलाषा को ही देखकर मुझे बुरा कह दिया था वही शम्भु अब मुनिगणों के ही समक्ष में दाराओं को किस तरह से ग्रहण करेंगे अथवा कौन सी नारी उन शम्भु की पत्नी होगी और कौन सी नारी है जो उनके मन में स्थान बनाकर अवस्थित हो रही है, जो योग के मार्ग से भ्रष्ट करके उनको मोहित करेगी। उनका मोह न करने में कामदेव भी समर्थ नहीं हो सकेगा। वे तो नितान्त योगी हैं, वे वीरांगनाओं के नाम को भी सहन नहीं किया करते हैं। मध्य और अन्त में सृष्टि होती है उनका वध अन्य कारित नहीं है अर्थात् अन्य किसी के भी द्वारा नहीं किया जा सकता है। इस भूमण्डल में कोई ऐसे होंगे जो महान् बलवान् मेरे द्वारा बाध्य होंवे। कुछ भगवान् विष्णु के