भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 229, कुल 442 में से

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पृष्ठ 229

ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ २३१ पापी उसने वे सभी कन्याएँ बलपूर्वक हरण कर ली हैं। वह दुराधर्ष हैं और हयग्रीव की सहायता वाला है। सागर में भी असुरों तथा मनुष्यों का प्रमथन करके उसने लौहित्य तीर्थ के तट पर मणि पर्वत बनाया है उस पर्वत में अलका नाम वाली रम्यपुरी की रचना करके देवों और गन्धर्वों की नारियों को उसने बसाया है। वे सब एक वेणी को धारण करने वाली हैं और सम्भोग से वर्जित हैं। वे सब आपकी ही प्रतीक्षा कर रही हैं। हे कृष्ण! आप उन सबको सनाथ करें। जब तक आपके पुर में नारद मुनि आगमन करें। हे भौम! तब तक उसके साथ मैथुन करने का तुम प्रयत्न नहीं करोगे। यही दुरात्मा नरक के साथ उनकी शर्त थी। जिस समय नारद मुनि प्राग्ज्योतिष पर पहुँचे उसी समय आप नरक के हनन करने के लिए गमन करेंगे। इस कारण से उस पाप कर्म करने वाले नरक के ही सदृश नरक को मार दीजिए क्योंकि वह बहुत दुरासद है और देवों तथा मनुष्यों का कण्टक है। उसके वध कर देने से देवी पृथिवी पुत्र के शोक को प्राप्त होगी क्योंकि उसने स्वयं ही उसके वध करने के लिए देवताओं से प्रार्थना की थी। इस कारण से उस महान् पापी पुरुष नरक का वध करिए। उसका हनन करके स्त्री रत्नों को तथा अन्य रत्नों का उद्धार कीजिए। महान् आत्मा वाले इन्द्र के द्वारा इस प्रकार से जगतों के नाथ से कहा गया तो उन्होंने पृथिवी के पुत्र नरक के हनन करने के लिए प्रतिज्ञा की और उसी समय मार देने का वचन दिया था। इन्द्र के साथ भगवान् केशव ने उसके वध करने की प्रतिज्ञा कर उसी समय प्राग्ज्योतिष पुर की ओर यात्रा कर दी थी। भगवान् कृष्ण ने गरुड़ पर समारोहण किया था और उनके साथ दूसरी सत्यभामा भी थी। वे प्राग्ज्योतिष की ओर मुख करके चले गये थे और इन्द्रदेव स्वर्ग में गमन कर गये थे। देवलोक का आक्रमण करके गमन करते हुए इन्द्र और श्रीकृष्ण को जो महतीद्युति से सम्पन्न थे। यादवों ने वहाँ पर सूर्य और चन्द्र के समान ही देखा। वे दोनों गन्धर्व-देव और अप्सराओं के गणों के द्वारा स्तवन

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