भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 279, कुल 442 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 279

ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ २८१ जो भी अपने प्राणों को त्यागकर मृत्यु को प्राप्त करता है तो यह पुरी उसको दिव्य ज्ञान प्रदान किया करती है। उस पुरुष को महादेव स्वयं ही संसार के आवागमन की ग्रन्थि के बन्धन का छुटकारा पाने के लिए कृपा किया करते हैं। वहाँ पर मृत होकर पुरुष दूसरे जन्म में उत्पन्न होकर परम योगी हो जाता है। भगवान् हर के द्वारा सम्मत होता हुआ वह सुलभ उपाय के द्वारा ही वह पुरुष निर्वाण पद को प्राप्त हो जाता है अर्थात् मुक्ति प्राप्त कर लेता है। वहाँ योग से युक्त महादेव सदा पार्वती के सहित निवास किया करते हैं। देव, गन्धर्व यक्षों का और मनुष्यों को नित्य ही हर ज्ञेय (जानने के योग्य) और प्रकाश है और वह क्षेत्र प्रकाशित है। वहाँ पर देव कामनाओं का प्रदान करने वाले नहीं है और शीघ्र ही प्रसन्न नहीं होते हैं। चिरकाल प्रीति से आराधना किए हुए ही निर्वाण के लिए ही प्रसन्न हुआ करते हैं। वह पुरी गौरी के द्वारा विवर्जित है। वह योग का स्थान महाक्षेत्र हैं वहाँ किसी समय में शांकरी देवी गमन नहीं किया करती है। यह वाराणसी है।

कामरूपी पीठ का वर्णन

अत्यन्त तीव्र तप चिरकाल में मोक्ष के प्रदान करने वाला होता है। शीघ्र ही कामनाओं का देने वाला परम पुण्यमय क्षेत्र 'पीठ' कहा जाया करता है। पूर्व में वन्दना करने वालों के द्वारा वह क्षेत्र लोकों में चिरकाल में काम के प्रदान वाले का कहा जाता है। किन्तु जहाँ पर चिरकाल में भी ज्ञान देने वाले देव नहीं हैं। कामरूप महापीठ है जो गुह्य से भी परम गोपनीय है। वहाँ पर देव शंकर पार्वती के सहित सदा ही सन्निहित रहा करते हैं। वहाँ चिरकाल में पूजित हुए देव भी उस पीठ में प्रसन्न नहीं हुआ करते हैं। वहाँ पर शिव के भक्त पर देवी पार्वती निश्चय ही अनुग्रह किया करती है। परमेश्वर अपने भक्त के लिए शीघ्र ही कामना किया करते हैं उस पीठ के विषय में मैं बताऊँगा। अब आप दोनों श्रवण कीजिए। पूर्व में जहाँ तक दिक्कर