भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 284, कुल 442 में से

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पृष्ठ 284

२८६ श्रीकालिका पुराण चाहिए । सम्पद प्रभृति मन्त्रों प्रसाद परम प्रशस्त कहा गया है । क्योंकि शम्भु के प्रसादन से ही मन्त्र सफल होता है । इसी कारण से मुनियों में श्रेष्ठों के द्वारा यह प्रसाद संज्ञा वाला कहा गया है । इस कारण से समस्त मन्त्रों में प्रसाद परमप्रीति के प्रदान करने वाला है । सम्पद मन्त्र भगवान् शम्भु के आमोद के रहने वाला कहा जाता है । मन की प्रापूर्ति करने ही से सन्दोह कहा गया है । नाद आकर्षण करने वाला नाद होता है । गुरुत्व होने से गौरव नाम वाला है । यह व्यस्त और समस्त अर्थात् अलग-अलग और सब पिताकर भगवान् शम्भु के मन्त्र कीर्तित किए गए । पञ्चाक्षर अर्थात् पाँच अक्षरों वाला जो मन्त्र है वह पञ्चवक्त्र का कहा गया है । आप दोनों उस ही मन्त्र के द्वारा ईश्वर का समाधान करिए । हे वेताल भैरव! मैं उनका ध्यान बतलाऊँगा, उसका भली-भाँति आप श्रवण करिए । अब शम्भु के स्वरूप का ध्यान बतलाया जाता है । शम्भु के पाँच मुख हैं- महान उनका शरीर है, वे जटाजूटों से समलंकृत हैं । सुन्दर चन्द्रमा की कला से समन्वित हैं, मस्तक केवालों से विभूषित हैं, शम्भु की दश वायु हैं और व्याघ्र चर्म ही उनका वस्त्र है । कण्ठ में भगवान् शम्भु के हालाहल कालकूट विष को धारण किए हुए हैं तथा नागों के हार से उनका वक्षःस्थल विभूषित है । भुजङ्ग ही उनके कीरीट का बन्धन है तथा नाग ही बाहुओं के भूषण बने हुए हैं । सम्पूर्ण अंगों में चाँदनी से अर्पित सुन्दर कान्ति के धारण करने वाला हैं । भस्म से सम्पूर्ण अंग संलिप्त हैं । एक-एक मुख में तीन-तीन नेत्र हैं । इस प्रकार से पन्द्रह ज्योतियों वाले नेत्रों से शोभित हैं । वृषभ के ऊपर विराजमान हैं और हाथी के चर्म के परिच्छादन वाले हैं । अब शम्भु के पाँचों मुखों के नाम बतलाये जाते हैं- सद्योजात, वामदेव अघोर, तत्पुरुष, ईशान ये पाँच मुख कीर्तित किए गए हैं । सद्योजात का वर्ण शुक्ल है और वह स्वच्छ स्फटिक के तुल्य है । वामदेव पीतवर्ण वाला सौम्य एवं मनोहर है । अघोर नीलेवर्ण वाला है और उसमें दाढ़ है जो भय को बढ़ाने वाला है । तत्पुरुष देव रक्तवर्ण