भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 336, कुल 442 में से

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पृष्ठ 336

൵७൲ श्रीकालिका पुराण ൵७൲ ३३९ नवमी में विधि के साथ पूजा जागरण और बलि करे । दशमी में क्रीड़ा, कौतुक, मंगलों द्वारा सम्प्रेषण करे । दशमी में नीराजन करे जो महान् बल और वृद्धि का करने वाला होता है । जिस समय जगन्मयी वैष्णवी देवी महामाया का पूजन करे वहाँ पर उस अवसर पर जो विशेषता है उसका, हे भैरव! अब आप श्रवण करिए । सूर्य के कन्या राशि पर संस्थित होने पर जो पूजा है वह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है उस तिथि में रात्रि से वैभव के सितारों से पूजा करनी चाहिए । नवमी से यथाविधि बलिदान करना चाहिए । वहाँ पर विशेष भूति के लिए जप, होम विधि के साथ ही करना चाहिए । मनुष्य को महादेवी का अष्ट पुष्पिका से भली-भाँति पूजन करना चाहिए । पहले समय में श्रीराम के ऊपर अनुग्रह करने के लिए रावण वध के लिए ब्रह्माजी के द्वारा महादेवी रात्रि में ही बोधित की गई थी । इसके अनन्तर वह निद्रा का त्याग करके नन्दा में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में नन्दा तिथि में गमन करने वाली हुई थी । जहाँ पर पहले श्री राघवेन्द्र थे वहाँ से लंका में गये थे । वहाँ पर महादेव जी ने गमन करके उस समय में राम और रावण को युद्ध करने के लिए नियोजित कर दिया था और अम्बिका देवी स्वयं अन्तर्धान हो गई थी । वहाँ बानरों और राक्षसों के माँस और रुधिर का भक्षण किया था । उस देवी ने श्रीराम और रावण का युद्ध एक सप्ताह तक नियोजित किया था । सातवीं रात्रि के समाप्त होने पर फिर नवमी में रावण को श्रीराम ने मार दिया था । वह जगन्मयी महामाया देवी ने उन दोनों की जब तक युद्ध की केलि हुई थी उसको स्वयं देखा था । तब तक सात रात्रियों में वह ही देवों द्वारा सुपूजित हुई थी और रावण के निहित हो जाने पर नवमी तिथि में समस्त देवगणों के द्वारा पूजा की गई थी । लोकों के पितामह श्री ब्रह्माजी ने दुर्गा देवी की विशेष पूजा की थी । इसके अनन्तर शार्वरोत्सवों के द्वारा देवी दशमी तिथि में देवी सम्प्रेषित की गई थी । इन्द्रदेव ने देवसेना का नीराजन किया था । और वह नीराजन देवसेना में शान्ति के लिए और देवों के राज्य की वृद्धि के