भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 36, कुल 442 में से

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पृष्ठ 36

൵ श्रीकालिका पुराण ൵ ३७ ब्रह्माजी से कहकर कामदेव ने उन गणों को अवलोकन करके गणों के आगे स्थित होते हुए कारण कहते हुए बोलना आरम्भ किया था। कामदेव ने कहा-हे ब्रह्माजी! ये आपका क्या कर्म करेंगे अथवा कहाँ पर संस्थित होंगे अथवा रहेंगे ? इनके क्या-क्या नाम हैं ? वहीं पर इनका आप विनियोजन कीजिए। अपने कार्य में इनका नियोजन करके इनको स्थान देकर इनका नाम रखिए। यह सब कुछ करके इसके पश्चात् महामाया का जो भी कुछ प्रभाव हो उसे मुझे बतलाइए। मार्कण्डेय महर्षि ने कहा-इसके उपरान्त समस्त लोकों के पितामह ब्रह्माजी ने उस कामदेव के वचन को सुनकर उनके कार्य आदि के विषय में आदेश देते हुए कामदेव के सहित उन गणों से कहा। ब्रह्माजी ने कहा-ये सब उत्पन्न होने के साथ ही निरन्तर 'मार डालो' यह बहुत बार बोले थे। बारम्बार इनसे यही वचन कहे गये थे। अतएव इनका नाम 'मार' यह होवे। मारात्मक होने से ये नाम से भी मार ही होवें। बिना अर्चना के ये सदा ही जन्तुओं के लिए विघ्न ही किया करेंगे। हे कामदेव! इन गणों का प्रधान कर्म तुम्हारा ही अनुगमन करना होगा। जिस-जिस समय जब-जब भी आप अपने कार्य के सम्पादन करने के लिए जायेंगे वहीं-वहीं पर भी उसी-उसी समय में तुम्हारी सहायता के लिए ये गण जाने वाले होंगे। तुम्हारे अस्त्र के वशवर्ती ज्ञानियों के चित्त की उद्भ्रान्ति करेंगे और सर्वदा ज्ञान के मार्ग में विघ्न उत्पन्न करेंगे। जिस प्रकार से सब जन्तुगण सांसारिक कर्म किया करते हैं ठीक उसी भाँति ये सब भी विघ्नों को भी करेंगे। ये सभी जगह पर कामरूप वाले और वेग से समन्वित स्थित होंगे। आप ही इन सबके गणाध्यक्ष हैं। ये पंचयज्ञों के अंशभोगी और नित्य क्रिया वालों के तोय भोगी होवें। मार्कण्डेय महर्षि ने कहा-वे सब यह श्रवण करके ब्रह्माजी के सहित कामदेव को परिवारित करके इच्छानुसार अपनी गति को सुनकर समवस्थित हो गये थे। हे मुनि सत्तमों ! उनके विषय में क्या वर्णन किया जा सकता है, उनके महात्म्य और प्रभाव का क्या वर्णन किया