भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 380, कुल 442 में से

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पृष्ठ 380

नमस्कार है । राजा आपका वरण करता है । हे नृपोत्तम! कल्याण हो । देवराज इन्द्र की ध्वजा के लिए इस पूजा का परिग्रहण करिए । इसके अनन्तर दूसरे दिन में उसका छेदन करके फिर आठ अंगुल मूल का ग्रहण करे तथा आगे की ओर से चार अंगुल को छेदन करके उसे जल प्रक्षिप्त कर देवे । फिर पुर के द्वार पर ले जाकर वहाँ पर केतु का निर्माण करके भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि में केतुका वेदी प्रवेश करना चाहिए । बाईस हाथ के मान वाला केतु अधम कहा जाता है । बत्तीस हाथ के मान वाला उससे ज्येष्ठ होता है । बयालीस हाथ के मान वाला भी होता है । इससे भी अधिक बावन हाथ के मान वाला उत्तम कहा गया है । हे नृप श्रेष्ठ! इन्द्र की पाँच कुमारियाँ करनी चाहिए । वे सब शालमयी हों और दूसरी शक्र मातृकाऐं होनी चाहिए । केतु के सेतुपाद के प्रमाण वाला तथा मन्त्री के दो हाथ करे । इस रीति से कुमारियों की रचना करके और मातृका तथा केतु को करके एकादशी तिथि में शुक्ल पक्ष में उस यष्टि की अधिवासित न करे । फिर यष्टि का अधिवास करे तो जो 'गन्ध द्वारा' आदि मन्त्रों के द्वारा किया जाना चाहिए । भगवान् अच्युत का अर्चन करके पीछे शुक्रदेव का पूजन करना चाहिए । इन्द्रदेव की प्रतिमा का निर्माण के स्वर्ण द्वारा अथवा काष्ठ के द्वारा करना चाहिए । अन्य किसी उत्तम धातु के द्वारा निर्माण करावे अथवा सबके अभाव में मृत्तिका से परिपूर्ण करे । उस प्रतिमा को मण्डल के मध्य में स्थापित करके विशेष रूप से अर्चन करे । इसके अनन्तर किसी परम शुभ मुहुर्त में राजा केतु को उत्थापित करे । हे पुरन्दर! आप हाथ में वज्र धारण किए हुए हैं । आप असुरों के हनन करने वाले हैं, आपके बहुत नेत्र हैं । समस्त लोकों के कल्याण करने वज्र के लिए यह पूजा ग्रहण कीजिए । हे अमरों के स्वामिन्! आप सबके धारण करने वाले हैं और सभी देवगणों के द्वारा अभिष्टुत हैं आप यहाँ पर आगमन कीजिए, यहाँ पदार्पण करिए । आप श्रवण के आद्यपाद से समुत्थित हुए हैं, आप इस पूजा का ग्रहण कीजिए । हे