कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंॐ श्रीकालिका पुराण ॐ ३९१ किया है । फिर सबसे बाहुल्य विष्णुधर्मोत्तर तन्त्र में सदाचार देखना चाहिए वह आपके ही प्रसाद से देखने के योग्य हैं । फिर जो हमको संशय है जो पहले आपके ही द्वारा नहीं कहा गया है । हे विप्रेन्द्र ! उस छेदन कीजिए । हम आपसे पूछते हैं । हमारे हृदय में बहुत ही अधिक कौतूहल है । वेदों और लोक में भी यह सुना जाता है कि जो पुत्र रहित है उसकी गति नहीं होती हैं । प्राचीन समय में वेताल और भैरव तप के लिए पर्वत पर गए थे । पूर्व में वे दोनों ही दाराओं के ग्रहण करने वाले थे । उन दोनों के पुत्र नहीं सुने गए हैं । हे द्विजोत्तम! वे ही उत्पन्न नहीं हुए थे अथवा अनेक उत्पन्न हुए थे । उनका उत्तम स्थान में भली भाँति से श्रवण करने की इच्छा करता हूँ । मार्कण्डेय महर्षि ने कहा-हे द्विज सत्तमो! बिना पुत्र वाले की गति नहीं होती है यह निश्चित ही है । अपने पुत्रों के द्वारा अथवा भाई के पुत्रों द्वारा पुत्रों वाले स्वर्ग में गए हैं । हे विप्रों! के द्वारा अथवा भाई के पुत्रों द्वारा पुत्रों वाले स्वर्ग में गए हैं । हे विप्रों! वे दोनों उत्पन्न सन्तानों वाले वे धीर बेताल भैरव थे । अब मैं उन दोनों के वंशों को बताऊँगा । हे महर्षि गणों! आप श्रवण कीजिए । जिस समय में बेताल और भैरव दोनों भली-भाँति सिद्धि प्राप्त करके कैलाश के प्रति हर्षित होते हुए बोध करने वाला यह तथ्य वचन कहा था । नन्दी ने कहा-आप दोनों पुत्र सहित भगवान् शंकर के आत्मज हैं । पुत्र के जन्म लेने में यत्न कीजिए । समुत्पन्न पुत्र वाले की सर्वत्र सुलभ गति हुआ करती है । जो पुत्र से हीन पुरुष होता है वह पुन्नाम वाले नरक को देखा करता है । उसका मोचन करने के लिए तपों द्वारा तथा धर्म के द्वारा भी समर्थ नहीं हुआ करता है । केवल पुत्र के जन्म होने ही से उस नरक के छुटकारा होता है । उस कारण से आप दोनों ही देवयोनियों में पुत्र का उत्पादन करिए । आप दोनों की अमर्त्य हैं । इस कारण से जैसे-तैसे भी सुरयोनियों में पुत्रों का उत्पादन करके आप दोनों ही शिवा और शिव के प्रिय होंगे और अविलम्ब ही उनके भवन को प्राप्त होंगे ।