भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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पृष्ठ 428

४३२ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 काली का अर्थ तत्त्व काली का शाब्दिक अर्थ है-कालः अर्थात् 'शिवः तस्य पत्नि काली ।' अथवा 'काली' शिव की पत्नी का नाम है । ये काली (भगवती) आदि और अन्त रहित अजन्मा और पूरे चराचर विश्व की स्वामिनी है । ये काल को उत्पन्न करने वाली तथा स्वयं उसे भी खा जाने वाली है । साकार-उपासकों और साधकों की सुविधा के लिए तन्त्र आदि शास्त्रों में इन्हीं का निराकार काली के गुण, ध्यान तथा स्वरूप आदि का वर्णन है । पौराणिक काली (मार्कण्डेय पुराण या दुर्गा सप्तशती में वर्णित) जो अम्बिका के ललाट से उत्पन्न हुई वह इन आद्या काली से भिन्न हैं । वे श्री दुर्गा जी के स्वरूपों से एक स्वरूप हैं । ॐ 卐 ॐ काली साधना मन्त्र क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा । दक्षिण कालिका का यह बाईस अक्षर का मन्त्र सब मन्त्रों में प्रधान माना गया है । इस मन्त्र के वर्णों का अर्थ इस प्रकार है- जलरूपी 'ककार' मोक्ष को प्रदान करने वाला है तथा अग्नि रूप 'रेफ' सर्वतेजोमयी है । 'क्रीं क्रीं क्रीं- ये तीनों बीज सृष्टि, स्थिति एवं लय को करने वाले हैं ।' 'बिन्दु' निष्कल ब्रह्मरूप है, अतः कैवल्य फल को देने वाला है । हूं हूं- ये दोनों बीज शब्दज्ञान को देने वाले हैं । ह्रीं ह्रीं- ये दोनों बीज सृष्टि, स्थिति एवं लय को करने वाले हैं। 'दक्षिण कालिके'-इस सम्बोधन से देवी का सामीप्य प्राप्त होता है तथा 'स्वाहा'-यह मन्त्र संसार का मातृ स्वरूप है तथा समस्त पापों को क्षय करने वाला है । ॐ 卐 ॐ