भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 439, कुल 442 में से

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पृष्ठ 439

ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ ४४३ यदि ध्यान युक्तं पठेद्यो मनुष्य,- स्तदा सर्वलोके विशालो भवेच्च । गृहे चाष्टसिद्धिर्मृते चापि मुक्तिः स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः ॥८॥ भावार्थ-जो मनुष्य ध्यान युक्त होकर इस अष्टक का पाठ करता है, वह सम्पूर्ण संसार में उच्चपद प्राप्त करता है । उसके घर में आठों सिद्धियाँ बनी रहती हैं तथा मृत्यु के पश्चात् मुक्ति प्राप्त होती है । हे देवि ! तुम्हारे इस स्वरूप को देवता भी नहीं जानते हैं ॥८॥ ॥ इति श्री मच्छंकराचार्य विरचितं श्रीकालिकाष्टम् समाप्तम् ॥ श्री काली स्तुति या कालिका रोगहरा सुवंद्या वैश्यैः समस्तै व्यवहारदक्षैः । जनैर्जनानां भयहारिणी च सा देवमाता मयि सौख्यदात्री ॥१॥ या माया प्रकृतिः शक्तिश्चण्डमुण्ड विमर्दिनी । सा पूज्या सर्वदेवैश्च ह्यस्माकं वरदाभव ॥२॥ विश्वेश्वरी त्वं परिपासि विश्वं विश्वात्मिका धारयसीति विश्वम् । विश्वेशवन्द्याभवती भवन्ति विश्वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः ॥३॥ देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य । प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य ॥४॥ या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापत्मनां कृतिधियां हृदयेषु बुद्धि । श्रद्धां सतां कुलजन प्रभवश्य लज्जा तां त्वां नताः स्मरपरिपालय देवि विश्वम् ॥५॥