भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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४४६ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ आरती : श्रीकाली जी की मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े । पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट करें ॥ सुन जगदम्बा कर न विलम्बा, सन्तन के भण्डार भरें । सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करें ॥१॥ 'बुद्धि' विधाता तू जगमाता, मेरा कारज सिद्ध करें । चरण कमल का लिया आसरा, शरण तुम्हारी आन पड़े ॥ जब जब भीड़ पड़े भक्तन पर, तब तब आप सहाय करें । सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करें ॥२॥ 'गुरु' के वार सकल जग मोहे, तरुणी रूप अनूप धरे । माता होकर पुत्र खिलावै, कहीं भार्या होकर भोग करें ॥ 'शुक्र' सुखदाई सदा सहाई, सन्त खड़े जय कार करें । सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करें ॥३॥ ब्रह्मा, विष्णु, महेश फल लिए, भेंट देन सब द्वार खड़े । अटल सिंहासन बैठी माता, सिर सोने का छत्र धरे ॥ वार 'शनिचर' कुमकुम वरणी, जब लुंगड़ पर हुक्म करे । सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे ॥४॥ खडग खप्पर त्रिशूल हाथ लिये, रक्तबीज को भस्म करे । शुम्भ निशुम्भ क्षणहि में मारे, महिषासुर को पकड़ दरे ॥ 'आदित' वारी आदि भवानी, जन अपने का कष्ट हरे । सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे ॥५॥