भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 93, कुल 442 में से

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पृष्ठ 93

९४ ∾ श्रीकालिका पुराण ∾ और उन्होंने भगवान् शम्भु के जो मोह के वशीभूत हो गए थे वाष्पों को धारण करने हेतु शनैश्चर का स्तवन किया था। देवगण ने कहा-हे महान् भाग्य वाले! हे शनैश्चर देव! आप तो लोकों पर अनुग्रह करने वाले हैं। हे मूलशक्ति से समुत्पन्न होने वाले! आपका जन्म तो सूर्यदेव से ही हुआ है। आपके लिए हमारा नमस्कार समर्पित है। हाथ में शूल धारण करने वाले, पाश को धारण करने वाले और धनुर्धारी आपको नमस्कार है। आपका हस्त वरदान देने वाला है और अन्य तम की छाया के आत्मज हैं-ऐसे आपको नमस्कार है। हे नील मेघ के सदृश! आप पिसे हुए अञ्जन के तुल्य हैं। समस्त लोकों के प्राणों के धारण करने में कारणस्वरूप आपके लिए प्रणाम। आपको नमस्कार होवे। हे भगवान्! आप शीघ्रतापूर्वक प्रसन्न हो जाइए। भगवान् शम्भु के शोक से समुत्पन्न हुए वाष्पों आँसुओं से हमारी इस पृथिवी की रक्षा करो। जिस प्रकार से पुरातन समय में वर्षों तक वृष्टि का अवरोध किया था और आप ही ने मेघों से होने वाली वृष्टि को रोक दिया था अब उसी भाँति भगवान् हर के शोक के गिरे हुए वाष्पों के जल में भी कीजिए। अर्थात् इस आँसुओं के जल को भी रोक दीजिए। आपके द्वारा जलों का ग्रहण करना देखकर पुष्कर आदि उन मेघों ने महेन्द्र की आज्ञा से निरन्तर वर्षा को छोड़ा था अर्थात् सतत वृष्टि करते रहे थे। आपने पहले पूर्व समय में उस सम्पूर्ण वर्षा के जल को आकाश ही में विनष्ट कर दिया था। अब उसी भाँति भगवान् शिव के आँसुओं के जल को भी नष्ट करने के लिए प्रयत्न कीजिए। भगवान् शिव के वाष्पों के निवारण करने के कार्य से अन्य कोई भी आपके बिना सामर्थ्य रखने वाला नहीं है। यह शिव के शोक से समुत्पन्न आँसुओं का जल देव गन्धर्वों के सहित तथा पर्वतों के सहित ब्रह्मलोकों का दाह कर देगा। ऐसी ही इन आँसुओं के जल में दाहकशक्ति विद्यमान है। वह वाष्पों का जल इस भूमण्डल में गिरा है इसलिए आप अपनी माया से इनको धारण करो। मार्कण्डेय ऋषि ने कहा- समस्त देवों द्वारा इस प्रकार से भाषण