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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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किष्किन्धाकाण्ड ५४१

शासक के न होने से सारा गृध्र-समाज अपने आवास को छोड़कर बिखर जायगा। उस दुर्दशा को रोकने के लिए मुझे शीघ्र जाना आवश्यक है। हे मित्रो ! जिसमें हित हो, वही कार्य करो ।—यों कहकर संपाति अपने पंखों से आकाश को ढकता हुआ उड़ चला। ( १--६६ )


अध्याय १६

महेन्द्र-शैल पटल

कुछ वानर, यह निश्चय कर कि गृध्रराज झूठ बोलनेवाला नहीं है, अन्य वानरों से कहने लगे—कर्त्तव्य को शीघ्र संपन्न करनेवाले हे वीरो ! हमने ( सीता के समाचार को ) हाथ के आँवले के समान पूरा जान लिया है। जीवन देनेवाला एक वचन हमने सुन लिया। अब कर्त्तव्य का ठीक-ठीक विचार करके कुछ करो।

यदि हम सूर्य्यपुत्र और उज्ज्वल धनुष को धारण करनेवाले को नमस्कार करके सारा वृत्तांत उन्हें सुना दें, तो हमारा कर्त्तव्य पूरा हो जायगा। फिर, भी वीरता का कार्य तो यही होगा कि हम स्वयं समुद्र को पार कर सीता के दर्शन करें। हममें से समुद्र को पार करने का सामर्थ्य रखनेवाला कौन है ?—यों परस्पर प्रश्न कर वे एक-एक करके अपनी-अपनी शक्ति का वर्णन करने लगे।

पहले हमने मरने का साहस किया। सदा अमिट रहनेवाले अपयश को लेकर लौटने का भी साहस किया। अब उन दोनों कार्यों से छुटकारा पाने का एक अच्छा मार्ग ( संपाति के द्वारा ) हमने प्राप्त किया है। अब समुद्र को पार कर काले राक्षसों को मिटाने का सामर्थ्य रखनेवालो ! हमारे प्राणों को बचाओ।

युद्ध में विजय से भूषित होनेवाले नील आदि उत्तम वीरों ने, समुद्र पार करने की अपनी असमर्थता को स्पष्ट कह दिया। वीरता से पूर्ण युद्ध में विजयी वाली-पुत्र ने कहा—मैं समुद्र के उस पार तो जा सकता हूँ, किंतु लौट आने की शक्ति मुझमें नहीं है।

चतुर्मुख ( ब्रह्मा ) के पुत्र ( जाम्बवान् ) ने कहा—हे भुजबल से पूर्ण वीरो ! वेदों के लिए भी दुर्जय भगवान् ( विष्णु ), सारी धरती को एक ही पग से नापने लगा था। उस समय, मैं आठों दिशाओं में उस ( त्रिविक्रम ) की परिक्रमा करता हुआ गया और ( उस भगवान् के अवतार होने की ) घोषणा करता हुआ घूमने लगा था। मेरु के आघात से मेरे पैर दुखने लगे थे। अतः अब इस महान् समुद्र पर उछलकर जाने और लंका की परिखा के पार बने हुए प्राचीर पर कूदने और उस नगर के राक्षसों को भयभीत कर सीता का अन्वेषण करने की शक्ति मुझमें नहीं रह गई है।