कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकिष्किन्धाकाण्ड ५४३
तक नहीं लाते। सब वेदों का अध्ययन किया है। ब्रह्मा की आयु से भी अधिक आयु-वाले हो। तुम भी ब्रह्माओं में से एक कहलाते हो।
उस महिमामय प्रभु (राम) की भक्ति से युक्त हो। अपने कर्त्तव्य का पूर्ण ज्ञान रखते हो। तुमने अपने ऊपर (सीता का अन्वेषण करने का) दायित्व लिया है। बिना किसी बाधा के उसे पूर्ण करने का सामर्थ्य भी तुममें है। तुमने अपने मन में दृढ़ रूप से यह स्थापित कर लिया है कि एकमात्र पुण्य ही सदा स्थिर रहनेवाला है।
समय अनुकूल न होने पर तुम दबकर रह सकते हो। यदि युद्ध छिड़ जाय, तो उसमें सिंह के समान शक्तिमान् हो सकते हो। सोच-विचार करके जो कार्य आरंभ किया हो, केवल उसी को नहीं, किंतु, किसी भी कार्य को पूर्ण करने की शक्ति तुममें है। कठिन बाधाएँ उत्पन्न होने पर भी तुम पीछे हटनेवाले नहीं हो।
विजयशील इन्द्र से लेकर, सब व्यक्ति तुम्हारे चारित्र्य को ही आदर्श मानकर चलते हैं। तुम अत्यन्त सहनशील हो। अतः, सब कार्यों को ठीक ढंग से सोचकर करने का सामर्थ्य तुममें है। सभी इच्छित वस्तुओं को प्राप्त करने की शक्ति भी तुममें है।
तुम्हीं इस समुद्र को पार करने की शक्ति रखते हो। अतः, यहाँ से शीघ्र जाओ और हम सबको जीवन देकर यश प्राप्त करो। इससे तुम्हारी माता-तुल्य सीता देवी भी प्रसन्न होंगी और विपदा-रूपी अपार सागर को पार कर सकेंगी—इस प्रकार ब्रह्मपुत्र (जांबवान्) ने कहा।
जांबवान् ने जब ऐसा कहा, तब अत्यन्त ज्ञानवान् हनुमान् के दीन मुख पर मंदहास इस प्रकार विकसित हुआ, जिस प्रकार कमलपुष्प के मध्य रक्तकुमुद विकसित हो उठा हो। उसके कमल-जैसे कर मुकुलित हो गये। सब वानरों के आनंदित होते हुए, उसने अपने भावों को इन शब्दों में प्रकट किया—
तुम लोग ऐसे हो कि कुछ सोचने के पूर्व ही, ऊँची तरंगों से पूर्ण सातों समुद्रों को पार कर सकते हो, सब लोकों को जीत सकते हो और सीता देवी का अन्वेषण करके उन्हें ला सकते हो। ऐसा होने पर भी मुझ ज्ञानहीन की लघुता को प्रकट करने के लिए ही तुमने मुझे यह आदेश दिया है। अब मेरे समान भाग्यवान् और कौन होगा?
यदि तुम लोग कहोगे कि लंकापुरी को उखाड़कर ले आओ, या यदि कहोगे कि लोक-कंटक राक्षसों को मिटाकर, स्वर्णमय ताटंकधारिणी कलापी-तुल्य सीता को ले आओ, तो मैं तुम्हारे आदेश के अनुसार ही वह कार्य करूँगा। शीघ्र ही तुम अपनी आँखों से देखोगे।
जिस प्रकार विष्णु भगवान् ने धरती को नापा था, उसी प्रकार एक शतयोजन को एक पग में समाता हुआ मैं इस विशाल समुद्र को पार करूँगा। यदि इन्द्र आदि देवता भी आकर (रावण की ओर से) मेरे साथ युद्ध करेंगे, तो भी लंका में निवास करनेवाले सब राक्षसों का विनाश करके अपने कार्य को मैं अवश्य पूरा करूँगा।
यदि समुद्र उमड़कर सारी धरती को डुबोने लगे, या यह सारा ब्रह्मांड ही टूटकर अंतरिक्ष में उड़ जाय, तो भी मैं, मेरे प्रति दिखाई गई तुम्हारी कृपा और प्रभु की आज्ञा इन