भारतकोश
कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary

कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished354 पृष्ठ

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३२ कान्हडदे प्रबन्ध अद्लूपानि जण साधि मोकल्या, देपाब्यूं मेल्हाण । घोडा हाथी ऊंट पोठीया, भेसर पूठि पल्हाण ॥ १५२ मळिक तणा जूजूआ मरातब, मांहि भला झूझार । दल जोयंतां दीस आथम्यउ, तुहि न आवइ पार ॥ १५३ बंदीवाल्हू घणा सीदाता, दीठा पाडइ दाडि । दीसि अगासइ तावडि दाझइ, रातइ वाइ ताडि ॥ १५४ थानविछोह्यां बालक रोवइ, दीसइ सरपां धूप । आगइ एक टलवलइ तिरसइ, बीजी लागइ भूप ॥ १५५ एक मांदा, एक न सकइ ऊठी, एक अणूहाणा ऊघाडा । दाणा पांच लहह नवि पावा, एक तणइ पाए लोहडां ॥ १५६ १५२ अद्लूपानि-अदूपानि C D G J, अद्धलपानि F, अद्लूपान K. जण साधि-साधि C, जग साधि D. मोकल्या-मोस्यू B, मोकलीउ C. देपाब्यूं em-देपाडिउ A C, देपाडि B, देपाव्या D K, देपाव्यं F, देपाडू G, देपाडु J. मेल्हाण-मेहाण B, मेहलाण C G, मेहांग D K. ऊंट-उट A B, उंट C D K, उट F G. पोठीया-पोठीआ C F G J K, पोठिया D. भेसर-वेसरी D. पूठि-पूंठि C, नि J. पल्हाण-पल्लाण A, पल्हांग [L16