कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)
Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary
कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६२ कान्हडदे प्रबन्ध नितु नितु पूजा हुइ नवनवी, सहू जुहारइ भगति स्तवी। नवे पंडि कीरति विस्तरी, कान्हडि बात असंभव करी ॥ २५२ नरकपात उवेलइ जेड, मोटा संकट छोडिउ तेउ। मूरति पांच एक लिंगथी, छठी तास जमलि को नथी ॥ २५३ सोरठ भणी पधराव्यउ लिंग, एक भाग वागडि लोहसिंग। आवू ऊपरि थाहर भली, मूरति एक तिहां मोकली ॥ २५४ मूरति एक जालहुर मांहि, तिहां प्रासाद कराव्यु राइ। देउल एक सईंवाडी मांहि, पांच ठामि शंकर पूजाइ ॥ २५५ पांच लिंग जे पूजा करइ, गर्भवासि ते नवि अवतरइ। पद्मनाभ पंडित इम कही, पहिला खंड समापति हुई ॥ २५६ २५२ नितु नितु-नित २ B, निल C, नितु २ D J, नतनित H, नित नित K. हुइ-होइ J K, हइ H. नवनवी-निरमली C. सहू-राहु D K. जुहारइ-जुहारि B C, जोहारि J. भगति-भक्ति A, भगति B D, भगतइ K. स्तवी-मिली C, करी D. नवे पंडि-नव पंडे B C K, नवे षंडे D H J. कान्हडि-कान्हडि A, कान्हड C K, कान्हड D, काहानड H, कान्हि J. असंभव-ससंभम H. २५३ नरकपात-तरकपातक B H, नगरपात C, हुरकां पाति K. उवेलइ-उवेलिड B, कपाचि C, ऊवेलि H J. जेड-जेह B D, तेह C, जेय H, जेअ K. मोटा-मोटा B H J. छोडिउ-छूटि B, छोडि C H J, छोट्या K. तेउ-तेह B D, देह C, तेय H, तेऊ J, जेड K. मूरति-मूरति K. पांच-पंच B. लिंगथी-स्यंगथी H, लिगथी K. तास जमलि-जमलि तास B, तास जामलि C D H. नथी-नही A. २५४ सोरठ-सुरठ D, सूरठ H. पधराव्यउ-पधराव्या A B, पधराव्यु C H J, पधराव्यु D. लिंग-लिंग C, व्यंग H. एक-एय J वागडि-बागडि मोकल्यउ A, डि B, वागड C, वागेटि D. लोहसिंग-लोहिसिंगि B, लोहसंग C, लोहसींग H J K. ऊपरि-ऊपरि D. थाहर-थाहरि C. मूरति एक-एक महूरति J. तिहां-ठांनि C, तिंहा D. J gives the foll vs order: 255 a, 254 a; 254 b, 255 b. २५५ मूरति-महूरति J. जालहुर-जालोर A, जालोहर B, जालहर H, जालुहुर J, जालोरइ K. मांहि- मझारि A, माहि B, माहिं K. तिहां-तिंहा D. प्रासाद-प्रसाद B C D J. कराव्यु-करावि B, कराविउ C H, कराव्यउ K. राइ em-राय A B C D J K, राउ H. देउल-देऊल C, दउल H. एक सई-एक छह सई A, एक सि B, एक सु C J, एक सउ D, असाउलि H, एक छह K. मांहि-माहि A. पांच-पंच B, ए पांच C. ठामि-ठामि B C D H J. शंकर-सकर H. पूजाइ-पूषाय H. २५६ पांच-पाचे C D K, पांचि J. लिंग-लिंगे C, लिंगें D, स्यंग H, सेंगे K. जे-...C J K. करइ- करिइ B, करि C H J. गर्भवासि-गरभरासि A H. अवतरइ-विस्तरइ B, अवतरि C H J. A B D H K omit 256 b. C reads as 256 b: पदमनाभि वात ईम वही पहिला पंड समापति हुई; J reads as प्रथमनाभ पंडित ईम कहि प्रथम पंड समापति कहि. Note—The colophons of the first khaṇḍa are: इति प्रथम पंड समाप्तः ॥ A B, इति श्री कांहडदेकथायां प्रथमखंडमध्ये गुजराति सोरठ द्विदेश षंद नव- लाख सोमेउउ देव छेई गडि जालहुर पाणि दिराणि दल आव्यां कान्हडदे जीत्या अधिद्वारे प्रथम पंडः। C; इति कान्हडदे चतुर्पंड प्रथमखंड समाप्तंः। D; इति प्रथमषंडः । H; इति श्री प्रथमषंड समाप्तः ॥ J; इति श्री कान्हदे चउपट प्रथमखंड समाप्तः ॥ १ ॥ K.