भारतकोश
कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary

कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा

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आणि वार जाल्हुरि जईनई, तेज अम्हारउं दापूं । कइ सोनगिरि पालटूं प्राणि, कइ अम्हे आयुध नापूं ॥ ७७ पातिसाहि जउ करी प्रतिज्ञा, नइ दीधउं फुरमाण । पाटण हूंतु पान तेडावउ, इम बोलइ सुरताण ॥ ७८ कासीद तेडी छडे पीआणे, पाटण भणी चलाव्यउ । थाणदार जउ साम्हउ आवी, सिरि फुरमाण चडाव्यउं ॥ ७९ वांचिउ लेप सजाई कीधी, तेडाव्या सोनार । सोना तणउं कराव्यूं मंदिर, वारू पोलि पगार ॥ ८० घावन मण सोना तिणि लागा, पानि सरीसउ लीधउं । ढीली नगरि जईनई भेटइ पातिसाहनइ दीधउं ॥ ८१ ७७ आणी-आंणी D H J. वार-वारि B J. जाल्हुरि-जालुरि A, जाल्हरि H, जाल्लुहरि J, जालउरइं K. जईनई-जईइ B