कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)
Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary
कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा
DevanagariHindipublished354 पृष्ठ
पृष्ठ 197, कुल 354 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 197
१२५ कान्हडदे प्रबन्ध पद्मनाभ उच्चरइ प्रमाण, माणस वंदइ किसउं वपाण । वल्यु मलिक नवि कीधी जेडि, हींदू वली करेसि केडि ॥ १०७ पातसाह आगलि परि सुणी, गयउ रबारी वद्धामणी । पहिला हींदू आव्या जिसइ, मलिक नेव नवि जमलउ तिसइ ॥ १०८ सरोवरि विसरि सुण्यां नीसाण, पछइ मलिकनइ हूकं जाण । छोळ्यां वान सुणी परि नवी, आव्यउ मलिक तुरी तारवी ॥ १०९ हुई वेढि सरोवर तिणि वार, राउति भलां कीयां हथियार । चडपट घाइ एकमना भिड्या, लपणउ नइ साल्हउ रिण पड्या ॥ ११० १०७ पद्मनाभ-पदमनाभ पंडित A B, पदमनाभ C H J, पदमनाभि K, पद्मनाभि L. उच्चरइ-उचिरइ A, भणइ B, ऊचरि C J, उचरइ H L. प्रमाण-प्रगाम A, ...B, पुराण D, प्रमांम H, पुराण J. माणस-मांनवतुं