कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)
Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary
कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतृतीय खंड १३३ भय आपणउ चिति नवि धरइ, चाहूआण वीवाह नवि करइ । इसी वात बोलइ परधान, मछरीक मोटउं अभिमान ॥ १४५ हईइ रोस पातिसाहि धरिउ, चाहूआणसूं हठ आदरिउ । दल ऊपब्यां राडद्रह थयां, जांगी ढोल दमामां दीयां ॥ १४६ वापड्डुद्रि आब्यउ सुरताण, वीजइ दिनि गोअलि मेल्हाण । तरुअर छांहि निरमला नीर, आब्यां दल सुंदरला तीर ॥ १४७ करी वालि बांध्या केकाण, पालइ दीधां मयगल ठाण । ठामि ठामि फोज राहवी, भला काठगढ पाई नवी ॥ १४८ १४५ भय-वोल A, मु B H, कहिउ L. आपणड-आंपणठ A K, आपणु B C H J, आपणं D, आपणउं L. चिति-चिंति A, चिति C, चंति H, चींति K, चत्ति L. धरइ-धरिइ B, धरि H J. चाहूआण-चाहूयाण A, चहूआण C, चहूह्रअंण H J, चाहूवाण L. वीवाह-जो वीवाह C, विह्या D. नवि-नही A, नहि D. करइ- करिइ B, करि H J. इसी-असी C, इसीय L. बोलइ-बोल्हि B C H, कही J. परधान-परघांन A C H K, प्रघांन D, परघांनि J, परिधान L. मोटउं-मोटूं A, मोठ् B C H, मोटुं D, मोटउ J K L. अभिमान- अभिमांन A D H J K L. १४६ हईइ-दीइ A, हेइ B, हईई D, इहइ H, हियइ K, हीयइ L. पातिसाहि-पातसाहि A C H, पातसाहिँ B, पातसाइ D, पातशाइ J, पतिसाइइ K. धरिउ-धरीउ A, घरूं D, धराउ K L. चाहूआणसूं- चाहुयाण शूं A, चहूयाण सूं B, चहूआणासुं C, चहूह्रआंगसूं D, चहूह्रआंगसुं H, चहूह्रआंगतुं J, चाहूआंगसुं K, चाहुआणसु L. हठ-हठि L. आदरिउ-आदरटु D, आदरिउं H, आदरूउ K L. After 146 a H interpolates the following two lines: बोलि बात घरी अभिमांन काफर सेती बेइमांन । रवा नही मुह देषि घड़ी भिस्त्र न पावि सुगि पुंगही ॥. ऊपब्यां-ऊपढीयां A, ऊपरडिया B, ऊपज्या L. राडद्रह- राडद्रहा A, रुद्रि B, राद्रडि C, राहुद्रह J, राडग्रह K. थयां-धयां A, गया C, थीयां D, गयां K, गया L. ढोल-ढोळी D. दमामां-दुदामां A, दमामां B J, दमामा C K, ददांमां H, डुमांमा L. दीयां-दीया A L, दीआ C, दीआं J, दिया K. १४७ वापड्डुद्रि-वापडत्रइ A, बापहूट्टि C, आप रहुद्रि I, थापडुद्र J, वापडिद्र K, राडद्रह L. आब्यउ- आव्यु A J, आविउ B H. सुरताण-सुरताण C K, सुरतांन H, सरतांण J, शूरिताण L. वीजइ-बीजि B C D H J. दिनि-दिन D H J K, ... L. गोअलि-