भारतकोश
कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary

कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished354 पृष्ठ

पृष्ठ 239, कुल 354 में से

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१६६ कान्हडदे प्रबन्ध घडी घडी घडीयाले सोन, रातिदिवसनुं लाभइ मान । . चहुटां चउक चउतरां घणां, ठामि ठामि मांडइ पेषणां ॥ १८ सेरी सांथ मोकली वाट, नगर मांहि छोह पंक्ति हाट । घांची मोची सूई सूतार, वसइ नगर मांहि वर्ण अढार ॥ १९ गांछा छीपा नइ तेरमा, विवसाईया वसइ नगरमां । आपापणि काजि सहु मिलइ, चहुटइ हईई हईउं दलइ ॥ २० आसापुरी आदि योगिनी, देव चतुर्मुख गणपति अनी । कान्ह स्वामि गिरुआ प्रासाद, शिपर तडोवडि लागु वाद ॥ २१ आठ पुहर नित पूजा करइ, इंडै ध्वजावस्त्र फरहरइ । वलतइ वारि हुइ नितु जात्र, नाटक नृत्य नचावइ पात्र ॥ २२ १८ घडी घडी-घडी घडीनी C, घडी २ D K L. घडीयाले-घडीआले C E J K, घडीयाले D. सोन-

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