कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)
Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary
कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा
DevanagariHindipublished354 पृष्ठ
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चतुर्थ खंड १६१ गढ गिरुड जिसउ कैलास, पुण्यवंतनउ ऊपरि वास । जिसउ त्रिकूट टांकणे घडिउ, सपतधात कोसीसे जडिउ ॥ ३३ घणी फारकी विसमा मार, जीणइ ठामि रहइ झूझार । झूझवापनी समदा वली, विसमा वार वहइ ढींकुली ॥ ३४ गोला यंत्र मगरवी तणा आगइ गढ ऊपरि छइ घणा । ऊपरि अन्न तणा कोठार, व्यापारीया न जाणूं पार ॥ ३५ माणिक मोती सोनां सार, गढ मांहि गरथ भरिया भंडार । टांकां वावि भरयां घी तेल, बरस लाप पहुचइ दीवेल ॥ ३६ जूनां सालणां सूकां पड, ईधण भणी घणां लाकड । जालहुर गढ विसमउ घणउं, चाहूआण रायनूं वइसणउं ॥ ३७ ३३ गिरुड-गिरुलं K, गिरउं L. जिसउ-जैसु B, जिसु C, जेस्यूं D, जिसिउ E, जिमु J, जिसउं L. कैलास