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कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary

कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished354 पृष्ठ

पृष्ठ 309, कुल 354 में से

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२३४ कान्हडदे प्रबन्ध प्रेम संगि सवि सज्जन मिलइ, आसं मनोरथ सहूइ फलइ । प्राकृतबंध कवित मति करी, कलियुगि कथा अभय विस्तरी ॥ ३५२ चाहूआणकुलि कीरति घणी, पूगउ आस सविकहि तणी । पदमनाभ पंडित मति कही, चउथा पंड समाप्ति हुई ॥ ३५३ ३५२ C J omit vs 352 a. प्रेम-पुष्पि B, प्रेम D. संगि-( . ) गि A, संग B. सवि-सवे D. सज्जन-सजन A, जन D. मिलइ-मिलहं A, मलिइ B. आस-पुष्पि आस B, पूज्येइ आस D. सहूइ-...B D. फलइ-फलिइ B. प्राकृतबंध-प्राकृतबंधे D. कवित-क्ति J. मति करी-सुखरी A, मति धरी B. कलियुगि-कुलयुग C, कुलकुनि D, कलयुगि J. अभय-उभय B J, अभिनव C. विस्तरी-विस्तारे D. ३५३ चाहूआण em-चाहूयाग A

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