कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)
Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary
कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंडदे"! Wait! Look at Line 5: "राजा महोदरा संयती... बालबीम मीरी २। मरी भीर चिप या नि रुकसी नमः खा करेश..." Look at Line 6: "...चालते चव्यान सीह की आज राहि गोपफाण लाना ल..." Look at Line 7: "...मुगट तलांट गाय फर..." Look at Line 8: "...माधव..." -> "माधव वउनी वागवी माहना फमूहनी..." -> माधव ब्राह्मण! Madhava Vyasa/Brahmana! "माधव वउली वागवी माहनाफ मूहनी..." -> "माधव" is Madhava who went to Delhi to invite Alauddin! Look at Line 9: "...अनेक बंध जय जय जय सबद्द..." Look at Line 11: "...अलपखां संभार/धनुष नाव संध करा..." -> "अलपखां" (Alap Khan)!! Yes! "अलपखां संभार धनुष बाण संध करा"! Look at Line 11: "अलपखां संभार/धनुष बाण संध करा/बाण तथा रीशीर मी मूरा याउ..." Look at Line 12: "आसीरशी अनि का मां पीधा के वकिवाजी नाना बोल मूर गर करिपु बडी जगजल का होना उपरिय" Look at Line 13: "...४२ [जिंत