भारतकोश
कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary

कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished354 पृष्ठ

पृष्ठ 54, कुल 354 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 54

चित्र में प्रस्तुत हस्तलिखित प्रति के अन्तिम पृष्ठ (पत्र ५२ पृष्ठ/verso, पाण्डुलिपि 'K') का पंक्तिवार मूल पाठ:

व्यजातामसिदालाब जिंति दीया[ण] वा[ग]ह... [उ] जे केतत उवअणि जिनि सिषो तब परांग कीरति डंपण ब[लि] विस्मा[उ] जिणि सुणइ तेणि असाचा करी॥ [१] एणी तो जन यदि तियउ थयउ सूर जत्रीति थतणी तर काया बांण जनम गयउ अचेत उभउ आपन तापनी महा दुरत ए० ॥ ३०॥ अमर राज उलिम भव तरा जेट दातु पण न विकल अणुआरा जाण इकीरी तिका० ३० दतणी ॥ स ष द रकि थि प्र० ३०॥ लीअण॥२०॥ तारा उसुटटी तिरन लापं जे केली छत्रिम इस तल पोरी कर च म अ ड ते उ दित व त भा मा हे अंतारूं धतिक खवंटाहिवावलसूल नगर उतां मरण का पदमना तिल-छिइ ० पण विवेक आणए को सीरोल दरश अवती जत दुधिकति उनरंन नी वा मा इस्तार तीतण इपसा डा० अण्वर संघ उडित्त्वाशणत्र... इरा अथ थामणी मम रावट मना रि कारिति विस्तरी ॥ आ सो तजंतो सरीर उक्मा० चउपइ खंड ४ समाप्त रसूं दया रखउ जिंप नवन मां वाहहावत पदमनाभं बांण यंधवता जाम उउ डित वरा सामा समाप्तं ॥ इति प्रबंधा ॥ संवत १५१२ वरसे ... दिने सोमे मार विस्ता डूा० आगा ल उरण ट ठ त्रि न मे त्र मा अ उल कान्हडदे नाना पद सती जिनी ति ० अं० एन नवी ति हस्ताणी कर तिवगी प्रध॥ ७॥ एक हिवि हिन समा समडा ते हताणी मसि द्रुत ट र ल इजिक फल कल अद दाधु ईदान अककल गं गात ० ए इस त नो त्रा णो ॥ लिफ ५२ लक हत य क धि ध द व नी जि ष व ल इ इ दी द व नि निरमली अकफर म लवचन प्स आंणा अकप त ध दूया०