कर्मयोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)
Karma Yoga - Swami Vivekananda (Hindi)
स्वामी विवेकानन्द / पं. बदरीदत्त शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंछठा अध्याय
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पूर्ण हो।" उसकी दृष्टि में सब कुछ ईश्वर का है और उसी के लिए है। वह सब सङ्ग और सम्बन्धों से पृथक् होने पर भी प्रेम और पवित्रता का आदर्श है।
इनके पश्चात् उन लोगों का नम्बर आता है जो रजोगुणी अर्थात् राजस-वृत्तिवाले हैं। इनमें उत्साह, आन्दोलन और प्रयत्न की शक्ति होती है। ये सात्विक-भाववालों का अनुकरण करते हैं, संसार को उनका उपदेश सुनाते हैं। प्रथम कक्षा के लोग चुपचाप शान्ति के साथ सच्चे और शुद्ध भावों को इकट्ठा कर जाते हैं। दूसरी कक्षा के लोग अपने उद्योग और पुरुषार्थ द्वारा उनका संदेश लोगों को पहुँचाते हैं। गौतम-बुद्ध के जीवन-चरित्र में हमने कई बार पढ़ा है कि २४ बुद्ध उससे पहले हो चुके हैं और वह २५वाँ है। उन २४ बुद्धों के नाम तक को कोई नहीं जानता। किन्तु गौतम-बुद्ध, जो ऐतिहासिक बुद्ध है, स्पष्ट कहता है कि उसने अपने प्रचार का काम उनके उपदेशों के आधार पर आरम्भ किया है। उच्चकक्षा के मनुष्य सदा शान्त और प्रसन्न-चित्त रहते हैं। वे उच्च भावों की शक्ति को जानते हैं। उनको विश्वास है कि यदि वे अपनी गुफा के द्वार बन्द करके पाँच उच्च-कोटि के सिद्धान्त भी मनुष्यों के वास्ते छोड़ जायँगे तो भी, जब तक सृष्टि है, उनका यह पवित्र स्मारक संसार में बना रहेगा। वस्तुतः ये सिद्धान्त पहाड़ों को छेदते हुए, समुद्रों को चीरते हुए, संसार में परिक्रमण करते रहेंगे और अवसर पाकर मनुष्यों के हृदय और मस्तिष्क में प्रवेश करके उन्हें पवित्र और उच्च बना देंगे, जिनके प्रताप से मानुष-जीवन का उद्देश सफल और पूर्ण हो जायगा। ये सात्विक मनुष्य ईश्वर के