भारतकोश
कर्पूरमञ्जरी (महाकवि राजशेखर - प्राकृत सट्टक एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

कर्पूरमञ्जरी (महाकवि राजशेखर - प्राकृत सट्टक एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Karpuramanjari Sattaka of Rajasekhara with Commentary

महाकवि राजशेखर द्वारा

DevanagariHindipublished172 पृष्ठ

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२ ज० श्लो० | ज० श्लो० | णअणाईं पसइसरिसाइँ २ ३८ | चंडवालधरणोहरिणंकौ १ २१ | तदो चडस्सद्विसु सुत्तिसु ३ ४ चाहुआणकुलमोलिमालिआ १ ११ | तहा रमजवित्थरो जहू ण १ १४ चित्ते बहुहदि ण खुद्दवि २ ४ | ताडंकजुअं गडेसु २ ३७ | तारदोलणहेलासरंत २ ३५ छोछंति दंतरअणाइ ४ १४ | तिक्खागे तरलाणे २ ४६ | तिअलिवलिअणाही २ २४ जं धोअंजणसोणलोअणजु १ २६ | तिस्सा तायपरिक्खिणाअ २ २९ जं मुक्का सवणंतरेण सहसा १ २९ | तीए णिअंबफलए २ १५ जच्चजणजणिदपसाहणाइँ २ १९ | तेणं च मुत्ताहलमंडलेण ३ ५ जर्सिं विअप्पघडणाइ ३ १० | जाअं कुंकुमपकलीडमरी १ १६ | थोरण थण आग २ २० जा चक्कवट्टिघरिणी ३ १५ | जाण सहाअपसरत ३ ११ | दसेमि तं पि १ २५ जाणे पंकरुहाणणा ३ ३ | दज्झातागुर भूपयटिकल्लिआ ३ २७ जिस्सा दिट्ठी सरलधवला २ २३ | दट्टूण थोरथणतुगिमाण ३ ६ जिस्सा पुरो हरदि ३ ७२ | दिण्णा वल्लभालयलीड २ १६ जे घंटआ ४ २० | दिसवहुतसो ३ २१ जे णवस्स तिउसस्म ३ २४ | दूरे किआसु चंपभस्स ३ १ जे तीम तिक्खघलचस्स्रुति २ ५ | देता कप्पूरपूरप्फुरणमिव ३ २८ जे लंकागिरिमेहलादिँ १ २० | दोलारूविट्ठेओ यहं २ ३९ | णट्ठाणाहिं तित्तरं पि २ १ | पहीणं गंडवालीपुटमजचत्र १ १५ णवउरवअरुक्खो २ ४४ | पंचुच्छविसुरिद ४ ४ णहवट्टिदजोण्हाणिब्भरे ३ ७ | पंडुरेंग राह रअए ३ १२ णिम्मग्गचंगस्स वि २ २५ | परं जोन्हा उण्हा गरल्मरि २ ११ णिसा तरिणविथरा ४ २ | पअंगं णवरूअभंगिपदणा ४ ८ णीसासा हारलट्टीपरिसप २ १० | परिब्भमंतीअ ४ १६ णूणे हुवे इह २ १७ | पहया सब्भर्येपा १ * ण्हागारमुक्काइरणुयभाए १ २८ |