करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंफिर गाँव के कुछ बदमाश लोग त्यौहारों के उपलक्ष्य में घर-घर से चन्दा इकट्ठा करते हैं। सबसे जबरन चंदा लिया जाता है । एक सदस्य के 50-100 रुपये तय होते हैं । कुछ ग़रीबों को तो उधार लेकर देना पड़ता है चंदा । कारण बड़ा ही प्यारा होता है - देवताओं की पूजा और भण्डारा । वाह ! क्या भक्ति है! फिर नारे क्या होते हैं ! यहाँ आकर बकरा चढ़ाओ, पैसे चढ़ाओ, खुश करो देवतों को ...... मनोकामना पूर्ण होगी। साहिब बार-बार समझा रहे हैं—'ये केवल भ्रम के उत्पाती' । इनका लक्ष्य है कि आदमी भटकता रहे। मैं जितना पाखण्ड का विरोध डंके की चोट पर कर रहा हूँ, उतना कोई नहीं। आए दिन छल-कपट बढ़ता जा रहा है। कोई तांत्रिक बनकर, कोई ज्योतिषि बनकर, कोई सयाना बनकर, तो कोई पुजारी बनकर दुनिया को लूट रहा है । मेरी लड़ाई किसी देवी-देवता से नहीं है, किसी जाति विरादरी से नहीं है । मेरा लक्ष्य पाखण्डियों से सावधान करके यह बताना है कि ईश्वर आपमें है ...... कहीं बाहर नहीं। अच्छे पढ़े-लिखे लोगों को भी भ्रम में डाल दिया गया है। घर में सिनक निकल आए तो सयाना आकर कहता है कि फलाने बाबा जी निकल आए हैं। फिर कहता है कि मेरे पास आओ, मैं सब ठीक कर दूँगा । फिर पूरे परिवार वालों को ढोल बजा-बजाकर नचाता है । कुछ समय पहले राँजड़ी में ढोल बज रहा था । एक माई उठकर नाचने लगी। मैंने देखा; समझ गया कि इसे सयाने ने खूब नचाया है। ढोलक पर नाचते-नाचते उसे आदत हो गयी थी । एक लड़के को चौकी आती थी । जब उसे नाम दिया तो चौकी आना बंद हो गयी। एक दिन वो कहने लगा कि दिल करता है कि सिर घुमाऊँ। मैंने कहा- नहीं ! अब यह काम नहीं करना । व्यायाम कर और इस बीमारी से छूट। सयानों के इस भ्रम में केवल अनपढ़ लोग ही नहीं फँसे हैं। एक इंजीनियर के घर में सिनक निकल आई। अब वो एक दिन अपने घर ले आया। सारा घर दिखाया। फिर उस कमरे में ले गया, जहाँ सिनक निकली हुई थी।