भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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एक बार गुरुदेव के पास कुछ लोग आए, कहा कि यह कैसा कलयुग आ गया है, इंसान का बच्चा लंगूर बन गया है। तो गुरुदेव ने यह बात बताई थी । वो लंगूरों की तरह ही काट भी रहा था, लंगूरों की तरह आदमी से चिढ़ रहा था, सब काम कर रहा था, उलटे लटक रहा था। संभवतः वो शेर का बच्चा भी वैसे ही हो गया। एक गाय ने बच्चा दिया तो दूसरे दिन मर गयी । अब दूसरी गाय उसे दूध पिलाने लगी। वो समझ रही थी कि इसकी माँ मर गयी है। कभी-कभी वो दूध पिला देती थी। फिर उसे निप्पल से दूध पिलाने लगे। पहले विरोध हुआ । पर बाद में वो समझ गया कि उसकी जीविका का कोई और साधन नहीं है। संभवत: इसी तरह हमारी आत्मा मन और इंद्रियों के संग में बिगड़ी है। तो जंगल के शेर ने देख लिया कि घास खा रहा है । फिर आश्चर्य हुआ। वो वहाँ गया तो उसे देख बच्चा डरने लगा। शेर ने कहा कि डरो नहीं। उसने कहा कि तुम मुझे खा जाओगे। शेर ने कहा कि तू भी शेर है । उसने कहा कि मैं तो बकरी हूँ। वो डरने लगा।

पकड़ भेद ताहि समझाना ॥

वो बच्चे को चश्मे के पास ले गया और उसे दिखाया कि देख, मैं और तू एक जैसे ही हैं। उसने कहा कि क्या सच में मैं शेर हूँ ? शेर ने कहा कि तू शेर है। उसने उसे सब कुछ सिखा दिया। पंजा चलाना भी सिखा दिया । दहाड़ना भी सिखा दिया। उसकी वो ताक़त तो थी ही । इस तरह आत्मा की ताक़त कम नहीं हुई है, केवल मन के संग में कुंद हो गयी है ।

सबकी गठरी लाल है, कोई नहीं कंगाल ॥

...तो मृगपति और जंगल से आयो......

तो जब जंगल का शेर आया तो सब सिखा दिया ।

पकड़े भेद ताहि समझाना ॥

पानी के चश्मे में दिखाया कि तू क्या है। कहा कि तू अपनी माँ से बिछड़ गया था । उसे सब कुछ सिखाया, कहा कि अब जा ! सभी सिखाते हैं। चिड़िया उड़ना सिखाती है । कुत्तिया भी अपने बच्चे को सिखाती है । तो जब वो बकरियों के बीच में गया तो जैसे गडरिया पहले सबकी तरह उसे भी डंडा