भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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गुरु को कीजे दण्डवत, कोटि कोटि प्रणाम ।

कीट न जाने भृंग को, गुरु करले आप समान ॥

कभी-कभी आप सब एक दूसरे को समझाते हैं, अपना रंग चढ़ाने की कोशिश करते हैं, पर पूरा रंग नहीं चढ़ा पाते हैं। बच्चों को समझाते हैं कि अच्छे काम करो, झूठ नहीं बोलो, पर उसपर इस समझ की पूरी रंगत नहीं चढ़ पाती है, लेकिन साहिब कह रहे हैं गुरु अपने समान बना लेता है। ऐसा क्या फार्मूला है पूर्ण गुरु के पास कि अपनी तरह कर देता है। यह बहुत बड़ी बात हुई । वो अपनी तरह कर देता है। अभी तक विज्ञान इसको समझ नहीं पा रहा है। यह क्या चीज़ है ? किस तरह बदल देता है ? इसमें सत्य कितना है, इसमें वास्तिविकता कितनी है, वज़न कितना है ? इसके प्रमाण मिल रहे हैं कि यह चीज़ हो सकती है। आदमी परमात्मा के दर्शन क्यों करना चाहता है ? क्योंकि उसमें गुण है कि जो भी उसे देखता है, उसकी तरह हो जाता है । अब ध्यान क्यों कर रहे हैं? बड़ी खास चीज़ है यह। जाने-अनजाने यह मानव जानता है कि ध्यान से परमात्मा मिल जाते हैं। यानी ध्यान में परमात्मा तक पहुँचने की, उनसे बात करने की ताक़त है। दिव्य शक्तियाँ हैं ध्यान में कहीं। कभी-कभी महात्मा को कहते हैं कि ध्यान करके देखो कि हमारा काम सफल होगा या नहीं। इसका मतलब है कि गुरु जो शक्तियाँ स्थानांतरित करता है, ध्यान से करता है। माता-पिता नहीं कर पाते हैं यह काम | वो केवल ढाँचा ही बदल पाते हैं, पर व्यक्तित्व को नहीं । हमें अपनी तरह नहीं बना पाते हैं । साहिब एक जगह और कह हैं-

पारस में अरु संत में, तू बड़ो अंतरो जान ।

वह लोहा कंचन करे, गुरु करले आप समान ॥

उदाहरण देता हूँ । जबसे आप मेरे संपर्क में आए, पहले वाला व्यक्तित्व ख़त्म कर दिया। मैंने पहले वाले को मार दिया और उसे मधुमय बना दिया। अब आपकी विचारधारा, आपका स्वभाव सब मिलेगा मुझसे। माँ - बाप से नहीं मिलता है। आप कहते भी हैं कि बेटा अच्छा नहीं है, पता नहीं किस पर गया है, पर गुरु यह कला करता है। इस बात में वज़न है । भृंगा को भण्डारिन भी कहते हैं । वो बड़ा अजीब जीव है। सभी स्त्री-पुरुष हैं, पर वो केवल पुरुष