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काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

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४ ॥ काशिका ॥ ज ब ग ड द श् ॥ १० ॥ ज ब ग ड द इत्येतान्वर्णानुपदिश्य पूर्वांश्चान्ते शकारमितं करोति प्रत्याहारार्थम्। तस्य ग्रहणं भवति षड्भिः। भोभगोअघोअपूर्वस्य योऽशीति अका- रेण। हशि चेति हकारेण। नेद्वशि कृतीति वकारेण। झलां जश् झशीति जकारझकाराभ्याम्। एकाचो बशो भष् भषन्तस्य स्ध्वोरिति बकारेण ॥ ख फ छ ठ थ च ट त व् ॥ ११ ॥ ख फ छ ठ थ च ट त इत्येतान्वर्णानुपदिश्यान्ते वकारमितं करोति प्रत्याहारार्थम्। तस्य ग्रहणं भवत्येके न नश्छव्यप्रशानिति छकारेण। खफवे- त्यङ्मुत्तरार्थम् ॥ क प य् ॥ १२ ॥ क प इत्येतौ वर्णावुपदिश्य पूर्वांश्चान्ते यकारमितं करोति प्रत्याहारा- र्थम्। तस्य ग्रहणं भवति चतुर्भिः। अनुस्

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