काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)
Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras
आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 201, कुल 828 में से
संदर्भ में पढ़ेंलङ्करिष्णुरेव भवति" or what?
Wait! In Kashika 3.2.150:
"ताच्छीलिकेषु मिथो वासरूपविधिर्नास्तीति । तेनालंकरिष्णुरेव भवति नालंकर्त्ता ।"
Wait! Look at:
तेनालंकरिष्णुरेव भवत्यलंकर्त्ता ।?
Wait, look at: तेनालं
Then: क रि ष्णु रे व ?
Wait! Look at the glyphs:
क
रि
ष्णु
रे
व
Wait! Does it say तेनालंकरिष्णुरेव भवति नालंकर्त्ता?
Look at:
ते ना लं क रि ष्णु रे व -> wait, after तेनालं:
There is क र्त्ता तृ न्?
Wait, look at:
तेनालं
Then a consonant cluster: क with र् on top, त्त् in the middle... wait, look at र्त्ता in line 16: गन्ता has न्ता.
Wait! Look at line 13:
तेनालंकर्त्ता तृन् भवत्यलंकरिष्णुः ।
Wait, let's re-examine:
First glyph after