भारतकोश
काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished828 पृष्ठ

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Yes! The sentence in Kashika is: "रोणीशब्दः सर्वावस्थोऽण्प्रत्ययमुत्पादयति, केवलस्तदन्तश्च ।" In this print, the 'प्र' in 'प्रत्यय' might be slightly deformed or missing a loop, looking like 'त्', but the intended reading is definitely "सर्वावस्थोऽण्प्रत्यय-". Let's look at it: it has ऽ, ण, then a conjunct with a stroke to the left: it's actually 'प्र' where the loop is small, and 'त्य' or 'य'! Wait, it says: "ऽण्प्रत्यय-"!

Line 7 : मुत्पादयति, केवलस्तदन्तश्च । रौणः । आजकरोणः । सैंहिकरोणः ॥

Line 8 : कोपधाच्च ॥ ७९ ॥

Line 9 : ककारोपधाच्च प्रातिपदिकादणप्रत्ययो भवति चातुरर्थिकः । यथासं- Wait, is it "प्रातिपदिकादणप्रत्ययो" or "प्रातिपदिकादण्प्रत्ययो"? In L9: "प्रातिपदिकादणप्रत्ययो" (ण without virama, just as in L4 "रोणीशब्दादणप्रत्ययो").

Line 10 : भवमर्थसंबन्धः क्लृप्तलक्षणस्योवर्णलक्षणस्य चाञोऽप