काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)
Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras
आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा
DevanagariHindipublished828 पृष्ठ
पृष्ठ 674, कुल 828 में से
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(e-matra).
Then र्णि: ण with ि and repha on top!
Then ङ्!
Yes, exactly: ज्ञापकश्चुरादेर्णिङ् विश-!
Line 20:
ब्दनार्थस्यानित्य इति, तेनायमपि प्रयोग उपपन्नो भवति । महीपालवचः
Wait, is there a comma after इति?
Yes, there is a comma ,!
Line 21:
श्रुत्वा जुघुषुः पुष्पमाधवा इति । स्वाभिप्रायं शब्देनाविष्कृतवन्त इत्यर्थः ॥
Line 22:
अर्द्देः सन्निषिभ्यः ॥ २४ ॥
Wait, is it अर्द्देः or अर्देः?
Look at line 22: अर्देः or अर्द्देः?
There is र्, and double द: अर्द्देः!
And सन्निषिभ्यः?
Wait, the sutra is: "अर्देः संनिविभ्यः" (7.2.24).
Look at line 22:
अ र्द्देः
स न्नि वि भ्यः
Wait, the letter is वि or षि?
It's वि! `संनिविभ्यः