काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)
Kashyapa Samhita Hindi
महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा
स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished942 पृष्ठ
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८ | काश्यपसंहिता वा वृद्धजीवकीयं तन्त्रम्
संस्कृत-उपोद्घातस्य संक्षिप्ता विषयानुक्रमणिका
| विषया: | पृ. | विषया: | पृ. |
|---|---|---|---|
| उपोद्घातप्रस्ताव: | १ | अत्र देशविशेषनिर्देशः | ९६ |
| १. सोपक्रम आयुर्वेदपरिच्छेदः । | ४. भारतीयभैषज्यसमर्थनपरिच्छेदः । | ||
| आयुर्वेदविषयोपन्यासः | १ | भारतीयभैषज्यविद्यायाः प्राचीनत्वम् | ९९ |
| आयुर्वेदस्य प्राचीनत्वम् | २ | हिपोक्रिटसम्बन्धी विमर्शः | ११३ |
| आयुर्वेदः | ३ | ग्रीसभारतीयवैद्यकयोः प्रायिको विषयसंवादः | ११६ |
| वेदायूर्वेदयोः संबन्धः | ४ | प्राचीनग्रीसवैद्यकसंप्रदायाः | १२२ |
| वेदे आयुर्वेदीया विषयाः | ५ | यवनैर्भारतीयविषयाणामुपादानम् | १२४ |
| २. आचार्यपरिच्छेदो ग्रन्थपरिचयसहिताः । | भारतीयविदुषां ग्रीसोपगमः | १२८ | |
| आयुर्वेदस्य प्रकाशः, आचार्याश्च | १२ | अलेक्जेन्डरद्वारा भारतालोकप्रसारः | १२९ |
| आत्रेयसुश्रुतसंहिते | १६ | भारतालोकप्रसारे अशोकशिलालेखः | १३१ |
| भेडसंहिता | १७ | ग्रीसभारतयोः पुराकालात् संबन्धः | १३३ |
| हारीतसंहिता | १८ | ग्रीसे शस्त्रवैद्यकस्य पश्चात् प्रचारः | १३६ |
| नवोपलब्धेयं काश्यपसंहिता | १८ | प्राचीनमिश्रे भैषज्यविज्ञानम् | १४० |
| कश्यपस्य विमर्शः | १९ | असीरियाबेबिलोनिययोः पूर्वं भैषज्यज्ञानम् | १४१ |
| जीवकस्य विमर्शः | २८ | मिश्रबेबिलोनियेरानचीनेषु भारतीयशब्दादिसाम्यम् | १४२ |
| वात्स्यः | ३२ | प्राचीनभारतस्य देशान्तरं संबन्धः | १४४ |
| प्रसङ्गस्मृतानि आचार्यान्तराणि | ३९ | धन्वन्वर्यादीनां पौर्वकालिकता | १४६ |
| धन्वन्तरिदिवोदासश्च | ३९ | भारतीयस्रोतसो देशकाल व्याप्तिः | १४७ |
| सुश्रुतः | ४५ | पौष्कलावतकरवीर्यौरभ्राद्याचार्येषु वितर्कः | १४८ |
| आत्रेयः | ५४ | वैदिकसाहित्यमूलकं भारतीयभैषज्यसमर्थनम् | १५३ |
| अग्निवेशः | ५८ | भारतीयभूगर्भतः प्राचीन भैषज्यदृष्टिः | १५५ |
| चरकः | ५९ | प्राचीनतत्तद्देशभैषज्यविमर्शस्यावश्यकता | १५६ |
| वार्योविद-दारुवाह-नग्नजिद्-भेदाः | ६९ | ५. उपसंहारपरिच्छेदः । | |
| रसग्रन्थाः | ७१ | प्राचीनाचार्याणां गौरवानुसंधानम् | १५८ |
| ३. संस्कारतुलनादिसहितो विषयपरिच्छेदः । | प्राचीनग्रन्थानां विलोपो रक्षा च | १५९ | |
| प्रतिसंस्कारः | ७३ | नेपालग्रन्थमालायाः प्रथमप्रकाशः | १६१ |
| अस्य ग्रन्थस्य संहितात्वं तन्त्रत्वं च | ८६ | साहाय्यसमादरः | १६२ |
| कश्यपात्रेयभेडसुश्रुतग्रन्थानां तुलनाविमर्शः | ८७ | परिशिष्टम् । | |
| अस्य ग्रन्थस्य विषयः | ९१ | ज्वरसमुच्चये काश्यपसंहितायाः श्लोकसंवादः | १६३ |