काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)
Kashyapa Samhita Hindi
महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा
स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished942 पृष्ठ
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५७८ काश्यपसंहिता वा वृद्धजीवकीयं तन्त्रम्
| विषय | पृ. | प | विषय | पृ. | प |
|---|---|---|---|---|---|
| औद्भित्पदिजलगुणाः | ५४९ | ९ | नानाविधपशुपक्षिणां | ५५४ | २ |
| पानार्हं जलं | ५५० | १ | नानाविधजलचरमांसगुणाः | ५५६ | ३ |
| पानायोग्यं जलं | ५५० | ३ | मांसवर्गेषु श्रेष्ठाः प्राणिनः | ५५७ | ५ |
| भक्तादिमध्यान्तपीतजलगुणाः | ५५० | १२ | शरीरावयवेषु गुरुलघुत्वम् | ५५७ | ९ |
| शृतशीतजलगुणाः | ५५१ | १ | अवस्थाविशेषेण गुरुलघुत्वम् | ५५८ | १ |
| ऋतुभेदे पेयं जलं | ५५१ | ७ | शरीर-भोजन-देशादिविशेषेण | ५५८ | ४ |
| मांसगुणविशेषीयाध्यायः २२ । | देशसात्म्याध्यायः २३ । | ||||
| मांससामान्यगुणः | ५५२ | ३ | मध्यदेशः, तज्जानां सात्म्यं च | ५५९ | ३ |
| मांसरसगुणाः | ५५२ | ८ | पूर्वदेशाः, तज्जानां सात्म्यं च | ५५९ | ८ |
| संस्कारविशेषेण मांसगुणाः | ५५३ | ६ | दक्षिणदेशाः, तज्जानां सात्म्यं च | ५६० | ३ |