कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)
महाकवि सोमदेव भट्ट द्वारा
स्रोत: कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1960 (उद्गम)
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भी उसमें न होगा। नैपाली रूपान्तर में तो कथापीठ है ही नहीं पर काश्मीरी रूपान्तरों में पीठ अर्थात् कथापीठ है। इससे यह सम्भावित है कि नैपाली रूपान्तर, अर्थात् बुधस्वामी-कृत बृहत्कथाश्लोकसंग्रह में मूल कथापीठ के कुछ अंश मिल-जुल गए हैं। काश्मीरी रूपान्तरों में उदयन वासवदत्ता और पद्मावती की सम्पूर्ण कथाएँ हैं, पर बुधस्वामी में वे नहीं हैं। कुछ विद्वानों का मत है कि बुधस्वामी के ग्रन्थ का आरम्भिक भाग शायद खण्डित है। दूसरी ओर मूल प्राचीन बृहत्कथा के एक भाग के रूप में उदयन की कथा के होने के विषय में कुछ विद्वानों ने शंका उठाई है (दे विन्तरनित्स भारतीय साहित्य का इतिहास भाग ३)। इस प्रकार की मिली हुई कथा घटनाओं का विवरण यहाँ संभव नहीं तो भी वसुदेव हिण्डी के आधार पर मैं निश्चयपूर्वक यह मानता हूँ कि प्राचीन बृहत्कथा में उदयन-संबंधी कथाएं कथामुख से पूर्व कथापीठ नामक भाग में सम्मिलित थीं। बुधस्वामी ने बिना कारण इन कथाओं का असमावेश किया है। मूल प्राचीन बृहत्कथा की वस्तु आयोजना के परिणामस्वरूप उत्पन्न कुछ कालानुक्रमविषयक कठिनाइयों से बचने के लिए काश्मीरी लेखकों ने कथापीठ में समाविष्ट वर्ण्य विषय का अलग रीति से प्रयोग किया। मूल प्राचीन बृहत्कथा में वस्तु की आयोजना इस प्रकार होनी चाहिए थी— (१) कथापीठ—उदयन और उसकी रानियों की कथाएँ (२) कथामुख—कथा कहने वाले के रूप में नरवाहनदत्त का परिचय (३) नरवाहनदत्त द्वारा घटित जन्मों की शृंखला और (४) उपसंहार। "बुधस्वामी के बृहत्कथाश्लोकसंग्रह द्वारा बृहत्कथा का जो नैपाली रूपान्तर प्राप्त हुआ है उसके अनेक कथा-प्रसंगों का वसुदेव हिण्डी के साथ साम्य है। काश्मीरी रूपान्तरों के मुकाबले नैपाली रूपान्तर, मूल बृहत्कथा का सच्चा चित्र प्रस्तुत करता है। लाकोते का यह मत पूरी तरह मान्य है। उदाहरण के लिए वसुदेव हिण्डी की गणिकापुत्री सुहिरण्या की तरह ही बृहत्कथा- श्लोक-संग्रह की मदनमंजुका भी एक वारांगना की पुत्री है, पर काश्मीरी रूपान्तरों में मदनमंचुका एक बौद्ध राजा की दौहित्री है। वसुदेव की पत्नी गंधर्वदत्ता एक वणिक की दत्तक पुत्री है। बुध स्वामी में भी यह प्रसंग इसी प्रकार है, पर काश्मीरी रूपान्तर में गान्धार देश का राजा दोनों का स्वामी है। गन्धर्वदत्ता के पालन करनेवाले पिता की आत्मकथा समुद्री यात्रा में पराक्रम करने की अत्यन्त रम्यपूर्ण कथा है, एवं इसका यह अंश अलिफ़ लैला की कहानियों जैसा है। यह पूरी कथा काश्मीरी रूपान्तरों में छोड़ दी गई है। वसुदेव हिण्डी का कथानक इस अंश में बुध स्वामी से मिलता है। उसमें भी इसम कुछ अंश अधिक रसपूर्ण हैं। बृहत्कथाश्लोकसंग्रह के पाँच बड़े और आवश्यक अंश काश्मीरी रूपान्तरों में लुप्त हैं। वे वसुदेव हिण्डी में देखने को मिलते हैं। दूसरी बात यह थी, स्मारक, इसके पोषक हैं कि काश्मीरी रूपान्तर के जिन अंशों को स्पीयर ने मूल प्राचीन बृहत्कथा का साझा यथार्थ और प्रक्षिप्त माना था और ऐसे अंश काश्मीरी रूपान्तरों में रहे जिन?—उनका मात्र विसतेवाद का अंश वसुदेव हिण्डी में भी नहीं है, अर्थात् अबतक जो बिल्कुल सम्भावित मान परत थे, पर बृहत्कथाश्लोकसंग्रह के अपूर्ण होने के कारण जो निज