भारतकोश
कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)

कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)

महाकवि सोमदेव भट्ट द्वारा

स्रोत: कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1960 (उद्गम)

DevanagariHindipublished876 पृष्ठ

पृष्ठ 242, कुल 876 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 242

द्वितीय लम्बक २१ राजा उदयन उसके साथ विविध वार्तालाप के प्रसंग में वासवदत्ता को यौगन्धरायण की योजना बतला दी। वासवदत्ता ने उसकी योजना स्वीकार करके अपने महावत आषाढ़क को बुलाकर उसे हस्तिनी पर सवार करा दिया और देवता के प्रसाद का बहाना बनाकर प्रधान महावतों को खूब मद्य पिला दिया ॥१३-१५॥ इसके पश्चात् सायंकाल के समय आषाढ़क अपनी उस हस्तिनी को सजाकर तैयार करके वहाँ ले आया ॥१६॥ सजी हुई हस्तिनी ने एक चिग्घाड़ किया जिसे सुनकर हाथियों की शब्दावली को समझने वाले प्रधान महावत ने मद्ये में चूर अतएव अस्पष्ट अक्षरों में कहा- 'हस्तिनी कह रही है कि आज मैं तिरसठ योजन जाऊँगी' ॥१७-१८॥ इतना बोल लेने के बाद फिर उसे होश न रहा और न वह कुछ सोच ही सका। दूसरे महावतों ने भी मद्ये में चूर रहने के कारण उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। तदनन्तर वत्सराज यौगन्धरायण द्वारा दी गई औषधियों से बन्धनमुक्त होकर वीणा और वासवदत्ता के लाये हुए आयुधों के साथ वसन्तक के सहित वह उस हस्तिनी पर आरूढ हुआ ॥१९-२१॥ इसके पश्चात् वासवदत्ता भी अपनी एकान्त सहेली काञ्चनमाला के साथ उसी हस्तिनी पर सवार हो गई ॥२२॥ कुछ ही समय में वत्सराज उदयन अपने साथियों के साथ टूटी हुई चहारदीवारी के मार्ग से उज्जयिनी के बाहर निकल गया ॥२३॥ उस स्थान पर पहरा देनेवाले वीरबाहु तथा तालभट नामक दोनों क्षत्रिय सिपाहियों को वत्सराज ने स्वयं ही मार डाला ॥२४॥ बाहर निकलकर वासवदत्ता के साथ उदयन प्रसन्नतापूर्वक आगे बढ़ता गया। हस्तिनी पर आषाढ़क ने अंकुश लगा रखा था ॥२५॥ उधर उज्जयिनी में पहरेदारों ने दो वीर सिपाहियों की मृत्यु का समाचार राजा के पास पहुँचाया। चंडमहासेन ने चारों ओर खोज करने पर यह मालूम कर लिया कि उदयन वासवदत्ता को लेकर भाग गया। चंडमहासेन का लड़का पालक भी शोरगुल सुनकर और नलागिरि हाथी पर सवार होकर उनका पीछा करने लगा ॥२६-२८॥ २६